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हल्द्वानी में मौत को दावत देता अस्पताल?बिना फायर एनओसी चल रहे निजी अस्पताल पर प्रशासन मौन, बड़े हादसे का इंतजार!

| June 7, 2026 | 2 months ago | 1 min read

हल्द्वानी में लगातार सामने आ रहे अग्निकांडों और हादसों के बावजूद जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। अस्पतालों, मॉल और व्यावसायिक संस्थानों में फायर सेफ्टी ऑडिट के जिलाधिकारी के आदेश अब केवल कागजों तक सीमित नजर आ रहे हैं। जमीनी हकीकत यह है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी खुलेआम जारी है और जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठे हैं।

ताजा मामला नवाबी रोड स्थित “दृष्टि सेंटर फॉर एडवांस आई केयर” अस्पताल का है, जिस पर बिना पूर्ण फायर एनओसी और अन्य जरूरी अनुमतियों के संचालन के आरोप लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, तभी कार्रवाई होगी।

सबसे गंभीर बात यह है कि नियमानुसार किसी भी अस्पताल का संचालन बिना फायर विभाग की एनओसी, सीएमओ अनुमति, भवन कंप्लीशन प्रमाणपत्र और अन्य सुरक्षा मानकों के नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद अस्पताल के संचालन को लेकर सवाल उठ रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो ने पूरे मामले को और अधिक चर्चा में ला दिया है।

सीएम हेल्पलाइन तक पहुंचा मामला

वार्ड-11 निवासी पार्षद रवि जोशी ने इस संबंध में सीएम हेल्पलाइन पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि अस्पताल बिना फायर एनओसी और सीएमओ की स्वीकृति के संचालित किया जा रहा है। शिकायत में ग्राउंड फ्लोर पार्किंग व्यवस्था न होने का मुद्दा भी उठाया गया।

जांच में क्या निकला?

प्रशासनिक निरीक्षण में सामने आया कि अस्पताल प्रबंधन ने फायर एनओसी के लिए आवेदन तो किया है, लेकिन अभी पूर्ण अनुमति प्राप्त नहीं हुई है। निरीक्षण के दौरान भवन में अग्निशमन उपकरण लगे मिले, लेकिन निर्माण कार्य जारी होने के कारण पार्किंग स्थल पर निर्माण सामग्री पाई गई।

सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब निर्माण कार्य अभी पूरा नहीं हुआ और पूर्ण फायर एनओसी भी नहीं मिली, तो आखिर अस्पताल संचालन की अनुमति किस आधार पर दी गई?

जिम्मेदार विभागों की चुप्पी पर सवाल

फायर विभाग और प्रशासन एक-दूसरे पर जिम्मेदारी डालकर पल्ला झाड़ते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नियम केवल छोटे कारोबारियों के लिए हैं, जबकि बड़े संस्थानों पर कार्रवाई करने से अधिकारी बचते हैं।

हाल ही में रामपुर रोड अग्निकांड में दो लोगों की मौत के बाद भी प्रशासन की नींद नहीं टूटी। आरोप है कि आपातकालीन सूचना तंत्र तक कई घटनाओं की जानकारी समय पर नहीं पहुंचती, जिससे राहत और बचाव कार्य प्रभावित होते हैं।

बड़ा सवाल — हादसे के बाद ही क्यों जागता है प्रशासन?

अगर अस्पतालों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी जारी रही, तो भविष्य में कोई बड़ा हादसा होने से इंकार नहीं किया जा सकता। आखिर जिला प्रशासन और फायर विभाग कब तक केवल निरीक्षण और नोटिसों का खेल खेलते रहेंगे?

अब देखना यह होगा कि सोमवार तक कार्रवाई के आश्वासन पर प्रशासन कितना खरा उतरता है, या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा।

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