“जज भी इंसान हैं…” : ‘कॉकरोच’ टिप्पणी विवाद पर पूर्व CJI बीआर गवई का जवाब, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर भी बोले
नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान बेरोजगारों के लिए कथित तौर पर “कॉकरोच” और “पैरासाइट” जैसे शब्दों के इस्तेमाल को लेकर उठे विवाद पर भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे को अनावश्यक रूप से बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जा रहा है और लोगों को पूरे संदर्भ को समझे बिना निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए।
पूर्व CJI ने कहा कि न्यायाधीश भी आखिरकार इंसान होते हैं। कई बार सुनवाई के दौरान बिना किसी दुर्भावना या गलत इरादे के अनजाने में कुछ शब्द निकल जाते हैं। ऐसे शब्दों को संदर्भ से अलग करके विवाद का रूप देना उचित नहीं है।

उन्होंने सोशल मीडिया की भूमिका पर भी टिप्पणी करते हुए कहा कि आज के दौर में किसी भी बयान या टिप्पणी को पूरा संदर्भ समझे बिना वायरल कर दिया जाता है। इससे कई बार गलतफहमियां पैदा होती हैं और अनावश्यक विवाद खड़े हो जाते हैं। उन्होंने कहा कि समाज को सोशल मीडिया के फायदे और नुकसान दोनों को स्वीकार करना होगा।
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार पर भी रखा पक्ष
न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के सवाल पर पूर्व मुख्य न्यायाधीश ने स्पष्ट कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति है कि आज कोई भी संस्था भ्रष्टाचार से पूरी तरह अछूती नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अन्य क्षेत्रों और विभागों की तुलना में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार की घटनाएं अपेक्षाकृत कम हैं।
उन्होंने कहा कि न्यायपालिका की विश्वसनीयता और पारदर्शिता बनाए रखना बेहद जरूरी है और इस दिशा में निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए।
सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस
पूर्व CJI के इस बयान के बाद सोशल मीडिया पर एक बार फिर न्यायपालिका, अभिव्यक्ति और न्यायिक टिप्पणियों को लेकर बहस तेज हो गई है। एक पक्ष जहां इसे न्यायाधीशों के मानवीय पक्ष से जोड़कर देख रहा है, वहीं दूसरा पक्ष सार्वजनिक पदों पर बैठे लोगों की भाषा और शब्दों की जिम्मेदारी पर सवाल उठा रहा है।
I7 NEWS के लिए यह मामला इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह न्यायपालिका, सोशल मीडिया और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे संवेदनशील मुद्दों को एक साथ सामने लाता है।
