Thursday, July 2, 2026 | Loading...
BREAKING NEWS
प्राधिकरण से 100 कदम दूर सवालों के घेरे में निर्माण! जर्जर दुकानों के ऊपर बन रहा तीन मंजिला होटल?अफवाहों से बचें, हर पात्र मतदाता को मिलेगा नाम जुड़वाने का अवसर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडलराम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग, ट्रस्ट भंग करने की उठी आवाजहल्द्वानी पहुंचे GIEAIA महासचिव त्रिलोक सिंह, GIC Re में हिस्सेदारी बिक्री और निजीकरण का किया विरोधयंग बिजनेस मीट में महापौर का युवा व्यापारियों से संवाद, शहर के विकास में भागीदारी का किया आह्वानप्राधिकरण से 100 कदम दूर सवालों के घेरे में निर्माण! जर्जर दुकानों के ऊपर बन रहा तीन मंजिला होटल?अफवाहों से बचें, हर पात्र मतदाता को मिलेगा नाम जुड़वाने का अवसर कांग्रेस प्रतिनिधिमंडलराम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग, ट्रस्ट भंग करने की उठी आवाजहल्द्वानी पहुंचे GIEAIA महासचिव त्रिलोक सिंह, GIC Re में हिस्सेदारी बिक्री और निजीकरण का किया विरोधयंग बिजनेस मीट में महापौर का युवा व्यापारियों से संवाद, शहर के विकास में भागीदारी का किया आह्वान

प्राधिकरण से 100 कदम दूर सवालों के घेरे में निर्माण! जर्जर दुकानों के ऊपर बन रहा तीन मंजिला होटल?

| July 2, 2026 | 2 hours ago | 1 min read

जर्जर दुकानों के ऊपर तीन मंजिला होटल निर्माण, सड़क चौड़ीकरण के निशानों के बीच उठे बड़े सवाल”

रिपोर्ट: I7 NEWS | हल्द्वानी

हल्द्वानी शहर के व्यस्त बाजार क्षेत्र स्थित कथित खानचंद मार्केट में चल रहा एक निर्माण कार्य इन दिनों चर्चा और सवालों का विषय बना हुआ है। स्थानीय व्यापारियों और आसपास के लोगों के अनुसार, लगभग 50 वर्ष पुरानी दुकानों के ऊपर तीन मंजिला आलीशान होटल का निर्माण कार्य तेजी से किया जा रहा है, जबकि नीचे स्थित दुकानों की स्थिति को लेकर लंबे समय से चिंताएं जताई जाती रही हैं।

मौके से सामने आई तस्वीरों में भवन के चारों ओर सुरक्षा जाल लगाकर निर्माण कार्य किए जाने के संकेत दिखाई दे रहे हैं। वहीं नीचे स्थित दुकानों के लेंटर और छतों पर सीलन, पानी के रिसाव और जर्जर स्थिति जैसे निशान भी नजर आ रहे हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों के बीच यह सवाल उठ रहा है कि क्या पुरानी संरचना पर इतने बड़े निर्माण के लिए आवश्यक तकनीकी और संरचनात्मक परीक्षण कराए गए हैं।

स्थानीय व्यापारियों का कहना है कि यदि पुरानी दुकानों के ऊपर अतिरिक्त भार डाला जा रहा है, तो क्या भवन की भार वहन क्षमता (लोड बेयरिंग कैपेसिटी) का परीक्षण किया गया है? क्या निर्माण से पहले विशेषज्ञों की रिपोर्ट और संरचनात्मक सुरक्षा प्रमाणपत्र प्राप्त किए गए हैं? इन सवालों का जवाब अभी सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है।

इस निर्माण को लेकर एक और चर्चा यह भी है कि जिस भूमि पर निर्माण किया जा रहा है, वह पहले बगीचे अथवा अन्य उपयोग की जमीन रही थी और बाद में उसकी प्रकृति में परिवर्तन किया गया। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और इस संबंध में आधिकारिक दस्तावेज सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में संबंधित विभागों की ओर से स्थिति स्पष्ट किया जाना आवश्यक माना जा रहा है।

स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा है कि अतीत में इस भवन को लेकर ध्वस्तीकरण अथवा कार्रवाई संबंधी आदेश जारी किए गए थे। हालांकि, इस संबंध में भी कोई आधिकारिक पुष्टि या दस्तावेज फिलहाल उपलब्ध नहीं हैं। यदि ऐसे आदेश वास्तव में जारी हुए थे, तो यह सवाल भी उठता है कि वर्तमान में निर्माण कार्य किस आधार पर आगे बढ़ रहा है।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह निर्माण स्थल विकास प्राधिकरण कार्यालय से बेहद कम दूरी पर स्थित बताया जा रहा है। इतना ही नहीं, शहर की कोतवाली भी इस स्थान के सामने ही मौजूद है। ऐसे में स्थानीय लोगों का कहना है कि जब प्रशासनिक और निगरानी तंत्र इतनी नजदीक मौजूद है, तब भी निर्माण को लेकर उठ रहे सवालों का जवाब आखिर कौन देगा?

मामले को और दिलचस्प बनाते हैं वे निशान, जो कथित रूप से भवन के बाहरी हिस्से और दुकानों पर सड़क चौड़ीकरण से संबंधित बताए जा रहे हैं। यदि भविष्य में इस क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण की योजना प्रस्तावित है, तो क्या संबंधित निर्माण के लिए इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए अनुमति प्रदान की गई है? यह भी एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है।

स्थानीय नागरिकों के बीच यह चर्चा भी है कि यदि कोई आम व्यक्ति या छोटा व्यापारी भवन निर्माण के नियमों का उल्लंघन करता है, तो उसके खिलाफ तत्काल कार्रवाई होती है, लेकिन बड़े निर्माण कार्यों के मामलों में अक्सर नियमों के पालन को लेकर सवाल उठते रहते हैं। ऐसे में लोगों के मन में यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या कानून और नियम सभी के लिए समान रूप से लागू हो रहे हैं?

यह मामला केवल एक निर्माण परियोजना तक सीमित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक सुरक्षा, शहरी नियोजन और प्रशासनिक पारदर्शिता से भी जुड़ा हुआ है। यदि निर्माण पूरी तरह वैध और नियमों के अनुरूप है, तो संबंधित विभागों को स्वीकृत मानचित्र, अनुमति और आवश्यक तकनीकी दस्तावेज सार्वजनिक कर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। वहीं यदि कहीं कोई अनियमितता पाई जाती है, तो उस पर नियमानुसार कार्रवाई भी अपेक्षित है।

फिलहाल, इस पूरे मामले ने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब निगाहें विकास प्राधिकरण, नगर प्रशासन और संबंधित विभागों पर टिकी हैं कि वे इन सवालों के जवाब कब और किस रूप में देते हैं।

I7 NEWS इस मामले से जुड़े सभी तथ्यों और संबंधित विभागों के आधिकारिक पक्ष को भी प्रमुखता से प्रकाशित करेगा। यदि भवन स्वामी, संबंधित विभाग या प्रशासन अपना पक्ष रखना चाहता है, तो उसे भी यथावत प्रकाशित किया जाएगा।

Link copied to clipboard!