कैंसर के इलाज में नई उम्मीद: संबलपुर यूनिवर्सिटी ने तैयार की हर्बल दवा, इंसानों पर ट्रायल की तैयारी

भुवनेश्वर/संबलपुर। कैंसर जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारी के इलाज को लेकर वैज्ञानिकों ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। ओडिशा की संबलपुर यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों ने गंधमार्दन पहाड़ियों में मिलने वाले औषधीय पौधों से एक एंटी-कैंसर पॉली-हर्बल दवा विकसित की है। जानवरों पर किए गए शुरुआती परीक्षणों में इस दवा के उत्साहजनक परिणाम सामने आए हैं, जिससे कैंसर मरीजों के लिए भविष्य में कम लागत और कम दुष्प्रभाव वाला इलाज मिलने की उम्मीद बढ़ी है।


हालांकि वैज्ञानिकों ने स्पष्ट किया है कि यह दवा अभी आम लोगों के लिए उपलब्ध नहीं है। इसकी सुरक्षा और प्रभावशीलता इंसानों पर होने वाले क्लिनिकल ट्रायल के सफल परिणामों के बाद ही वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित मानी जाएगी।
2019 से चल रही थी रिसर्च
यह शोध संबलपुर यूनिवर्सिटी के बायोटेक्नोलॉजी एवं बायोइन्फॉर्मेटिक्स विभाग और रिसर्च सेंटर ऑफ एक्सीलेंस द्वारा वर्ष 2019 में शुरू किया गया था। आयुर्वेद विशेषज्ञों की सलाह पर गंधमार्दन क्षेत्र के लगभग 50 औषधीय पौधों का अध्ययन किया गया, जिनमें से गहन परीक्षण के बाद 5 विशेष औषधीय पौधों को एंटी-कैंसर फॉर्मूला तैयार करने के लिए चुना गया।
जानवरों पर मिले बेहतर परिणाम
वैज्ञानिकों के अनुसार, प्रयोगशाला में चूहों के शरीर में कैंसर कोशिकाएं विकसित की गईं। इसके बाद करीब 35 दिनों तक हर्बल दवा देने पर ट्यूमर पूरी तरह समाप्त हो गए।


रिसर्च टीम का दावा है कि पारंपरिक कीमोथेरेपी की तुलना में इस दवा से जानवरों में कोई गंभीर साइड इफेक्ट नहीं देखा गया।
इंसानों पर जल्द शुरू होंगे ट्रायल
बायोटेक्नोलॉजी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर प्रदीप नायक ने बताया कि जानवरों पर ट्रायल के दो चरण सफलतापूर्वक पूरे हो चुके हैं, जबकि दो चरण अभी बाकी हैं। अगले 90–95 दिनों तक और अध्ययन किया जाएगा। इसके बाद इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल शुरू करने की तैयारी की जाएगी।
उन्होंने बताया कि CCRAS (Central Council for Research in Ayurvedic Sciences) के साथ समझौता किया गया है और देश के मान्यता प्राप्त अस्पतालों में मरीजों पर परीक्षण कराया जाएगा।
तीन चरणों में होगा मानव परीक्षण
इंसानों पर क्लिनिकल ट्रायल तीन चरणों में होंगे—
- पहला चरण: 20–30 मरीजों पर परीक्षण।
- दूसरा चरण: 200–300 मरीजों पर अध्ययन।
- तीसरा चरण: 4,000–5,000 मरीजों पर व्यापक परीक्षण।
यदि तीनों चरण सफल रहते हैं और दवा सुरक्षित एवं प्रभावी साबित होती है, तभी इसे व्यावसायिक रूप से बाजार में उपलब्ध कराने की अनुमति ली जाएगी।
कम लागत वाला इलाज बनने की उम्मीद
रिसर्चर्स का मानना है कि यह हर्बल फॉर्मूला भविष्य में कीमोथेरेपी और रेडिएशन थेरेपी का बेहतर विकल्प साबित हो सकता है, क्योंकि इसका उद्देश्य कैंसर कोशिकाओं को निशाना बनाना है, जबकि स्वस्थ कोशिकाओं को कम नुकसान पहुंचाना है। हालांकि, इस दावे की पुष्टि केवल सफल मानव परीक्षणों के बाद ही हो सकेगी।
इस शोध में आधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों का उपयोग किया गया है। कैंसर सेल सैंपल नेशनल सेंटर फॉर सेल साइंस (NCCS), पुणे से प्राप्त किए गए थे।
महत्वपूर्ण बात
विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल यह दवा रिसर्च और परीक्षण के चरण में है। कैंसर के मरीज बिना डॉक्टर की सलाह के किसी भी हर्बल या वैकल्पिक उपचार को अपनाने से बचें। सफल क्लिनिकल ट्रायल के बाद ही यह तय होगा कि यह दवा मरीजों के लिए सुरक्षित और प्रभावी है या नहीं।
– I7 NEWS
