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अब नहीं चलेगी मनमानी: DM की सख्ती से हल्द्वानी में शिक्षा माफिया पर बड़ी चोट, 46 स्कूलों को नोटिस

| April 8, 2026 | 2 months ago | 1 min read

हल्द्वानी | 8 अप्रैल 2026

हल्द्वानी में शिक्षा व्यवस्था को पारदर्शी और अभिभावक हितैषी बनाने के लिए जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। जिलाधिकारी की सख्त कार्यशैली एक बार फिर चर्चा में है, जहां उन्होंने निजी स्कूलों और बुक सेलरों के गठजोड़ पर करारा प्रहार किया है।

प्रशासन और शिक्षा विभाग की संयुक्त जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आने के बाद मुख्य शिक्षा अधिकारी ने 46 निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया है। यह कार्रवाई साफ संकेत देती है कि अब शिक्षा के नाम पर मनमानी और अभिभावकों का आर्थिक शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

🔍 जांच में क्या निकला सामने?

जांच समिति की रिपोर्ट में कई गंभीर अनियमितताएं उजागर हुईं—

  • अभिभावकों को जबरन महंगी निजी प्रकाशकों की किताबें खरीदने के लिए बाध्य किया गया
  • एनसीईआरटी की सस्ती किताबों को नजरअंदाज किया गया
  • स्कूलों द्वारा तय दुकानों से ही किताबें खरीदने के निर्देश
  • सीबीएसई के नियमों का उल्लंघन
  • वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर और जरूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं

इन सबको प्रशासन ने गंभीरता से लेते हुए सख्त रुख अपनाया है।

⚖️ DM की सख्ती से मचा हड़कंप

जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल की स्पष्ट मंशा है कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए। उनके निर्देश पर हुई इस कार्रवाई से निजी स्कूलों में हड़कंप मच गया है।

DM की यह पहल अभिभावकों के लिए बड़ी राहत के रूप में देखी जा रही है, जो लंबे समय से महंगी किताबों और जबरन खरीद के दबाव से परेशान थे।

⏳ 3 दिन में देना होगा जवाब

सभी 46 स्कूलों को 11 अप्रैल 2026 शाम 5 बजे तक अपना स्पष्टीकरण देने का निर्देश दिया गया है।
यदि संतोषजनक जवाब नहीं मिला तो—

  • मान्यता/संबद्धता पर कार्रवाई
  • विधिक कार्रवाई
  • अन्य प्रशासनिक दंडात्मक कदम उठाए जाएंगे

📢 साफ संदेश: शिक्षा में नहीं चलेगी मनमानी

यह कार्रवाई केवल एक प्रशासनिक कदम नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में सुधार की दिशा में बड़ा संदेश है। DM रयाल की इस सख्ती से साफ हो गया है कि अब नियमों के खिलाफ चलने वाले संस्थानों पर सीधी कार्रवाई होगी।

👉 कुल मिलाकर, हल्द्वानी में शिक्षा के नाम पर चल रही मनमानी पर अब प्रशासन का डंडा चल चुका है—और यह शुरुआत भर मानी जा रही है।

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