अंकिता भंडारी हत्याकांड: हाईकोर्ट से तीनों दोषियों को राहत नहीं, सरकार की भूमिका पर फिर उठे सवाल
नैनीताल। बहुचर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने तीनों दोषियों—पुलकित आर्य, सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। न्यायमूर्ति रवींद्र मैठाणी और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ साह की खंडपीठ ने दो दिनों तक चली सुनवाई के बाद यह फैसला सुनाया।
हाईकोर्ट के फैसले के बाद तीनों दोषियों को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। हालांकि, उनकी ओर से दायर मुख्य अपील पर अभी सुनवाई लंबित है। यानी जमानत याचिका खारिज होने का मतलब यह नहीं है कि उनकी अपील का अंतिम फैसला भी हो गया है।

सरकार की किरकिरी क्यों?

अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासन के लिए लंबे समय से गंभीर सवाल खड़े करता रहा है। घटना के बाद से ही पीड़ित परिवार न्याय, पारदर्शी जांच और जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई की मांग करता रहा है।
मामले में निचली अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों को हत्या और साक्ष्य मिटाने के आरोपों में दोषी ठहराते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी। इसके बाद तीनों ने हाईकोर्ट में अपनी सजा के खिलाफ अपील दाखिल की और इसी दौरान जमानत की मांग भी की।
अंकिता वर्ष 2022 में ऋषिकेश के पास वनंतरा रिजॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करती थीं। 18 सितंबर 2022 को उनके लापता होने और बाद में शव बरामद होने के बाद यह मामला पूरे उत्तराखंड में आक्रोश का कारण बना था।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि इतने चर्चित और संवेदनशील मामले में पीड़ित परिवार को न्याय की अंतिम लड़ाई के लिए अब भी अदालतों का दरवाजा क्यों खटखटाना पड़ रहा है? सरकार की ओर से लगातार मजबूत पैरवी के दावे किए जाते रहे हैं, लेकिन इस मामले ने शासन-प्रशासन की कार्यप्रणाली पर कई बार सवाल खड़े किए हैं।
अंकिता भंडारी मामले में आज का फैसला तीनों दोषियों के लिए बड़ा झटका जरूर है, लेकिन परिवार और प्रदेश की जनता की निगाहें अब मुख्य अपील की सुनवाई और अंतिम न्यायिक फैसले पर टिकी हैं।
I7 News |
