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खाकी पर सबसे बड़ा प्रहार: सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा

| April 7, 2026 | 5 months ago | 1 min read

हल्द्वानी/मदुरै | I7 News

न्याय की प्रक्रिया भले ही समय लेती हो, लेकिन जब फैसला आता है तो वह इतिहास रच देता है। साल 2020 में तमिलनाडु के तूतीकोरिन जिले में हुए चर्चित सथानकुलम कस्टोडियल डेथ केस में मदुरै की विशेष अदालत ने बड़ा और सख्त फैसला सुनाया है। अदालत ने इस मामले में दोषी पाए गए 9 पुलिसकर्मियों को फांसी की सजा सुनाई है।


क्या था पूरा मामला?

जून 2020 में कोरोना लॉकडाउन के दौरान पुलिस ने मोबाइल दुकान चलाने वाले पी. जयराज और उनके बेटे बेनिक्स को कथित रूप से दुकान देर तक खुली रखने के आरोप में हिरासत में लिया था।

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<p class=आरोप है कि थाने के अंदर दोनों के साथ बर्बर मारपीट और अमानवीय व्यवहार किया गया। हालत बिगड़ने पर उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई।

इस घटना ने पूरे देश को झकझोर दिया था और पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों पर बड़ा सवाल खड़ा किया था।


अदालत का फैसला क्यों अहम?

यह फैसला कई मायनों में ऐतिहासिक माना जा रहा है:

  • कानून के सामने सब बराबर: वर्दीधारी होने के बावजूद दोषियों को सख्त सजा मिलना न्यायपालिका की निष्पक्षता दिखाता है।
  • कस्टोडियल टॉर्चर पर कड़ा संदेश: यह फैसला पुलिस अत्याचार के खिलाफ एक मजबूत चेतावनी है।
  • जनता का बढ़ा भरोसा: आम लोगों में न्याय व्यवस्था के प्रति विश्वास और मजबूत हुआ है।

देशभर में उठे थे विरोध के स्वर

इस मामले ने राष्ट्रीय स्तर पर आक्रोश पैदा किया था। मानवाधिकार संगठनों, राजनीतिक दलों और आम जनता ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की थी।

सोशल मीडिया से लेकर सड़कों तक न्याय की आवाज बुलंद हुई, जिसके बाद मामले की जांच तेज हुई और अदालत तक पहुंची।


I7 News का नजरिया

I7 News मानता है कि यह फैसला सिर्फ सजा नहीं, बल्कि एक संदेश है—
👉 वर्दी का मतलब सत्ता नहीं, जिम्मेदारी है
👉 कानून तोड़ने वाला चाहे कोई भी हो, सजा तय है

पुलिस व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की जरूरत पहले से कहीं ज्यादा महसूस की जा रही है।




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