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वीआईपी रूट पर बड़ा हादसा टला, लेकिन प्रशासन की आंखें अब भी बंद?

| June 20, 2026 | 3 months ago | 1 min read

हल्द्वानी। बर्फ वाली गली में शनिवार शाम चाय-मैगी के एक ठेले में गैस पाइप फटने से आग लग गई। पुलिस और फायर सर्विस की तत्परता से आग पर समय रहते काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। ठेला संचालक भूपेश कुमार को मामूली चोटें आईं, जबकि आसपास के लोगों की जान भी खतरे में पड़ सकती थी।

लेकिन इस घटना ने एक बार फिर प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

बर्फ वाली गली कोई सामान्य क्षेत्र नहीं है। यह वही इलाका है जहां कई सरकारी अधिकारियों के आवास और कार्यालय स्थित हैं तथा यह शहर का एक महत्वपूर्ण वीआईपी रूट भी माना जाता है। इसके बावजूद सड़क किनारे लगे अस्थायी ठेले, गैस सिलेंडरों का उपयोग और बढ़ता अतिक्रमण लंबे समय से जारी है।

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<p class=स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि आग आसपास की दुकानों, वाहनों या आवासीय परिसर तक पहुंच जाती तो स्थिति भयावह हो सकती थी। सवाल यह है कि जब प्रशासनिक अधिकारियों का रोजाना इस मार्ग से आना-जाना होता है, तब भी अवैध अतिक्रमण और सुरक्षा मानकों की अनदेखी क्यों नहीं दिखाई देती?

घटना के बाद चर्चाएं तेज हैं कि क्या प्रशासन अब जागेगा या फिर किसी बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा। आग तो बुझ गई, लेकिन इस घटना ने वीआईपी रूट पर सुरक्षा व्यवस्था और अतिक्रमण के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है।

मुख्य सवाल

  • वीआईपी रूट पर गैस सिलेंडर से संचालित ठेलों की अनुमति किसने दी?
  • क्या इन ठेलों का कोई सुरक्षा निरीक्षण होता है?
  • सरकारी कार्यालयों के आसपास बढ़ते अतिक्रमण पर कार्रवाई क्यों नहीं?
  • अगर आग फैल जाती तो जिम्मेदारी किसकी होती?

आज पुलिस की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया, लेकिन क्या प्रशासन इस चेतावनी को गंभीरता से लेगा या अगली दुर्घटना का इंतजार करेगा?

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