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सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा,

| April 1, 2025 | 1 year ago | 1 min read

प्रशासन की लापरवाही उजागर

हल्द्वानी: उत्तराखंड का प्रमुख सरकारी अस्पताल सुशीला तिवारी हॉस्पिटल (एसटीएच) एक बार फिर से लापरवाही के कारण सुर्खियों में है। अस्पताल प्रशासन की अनदेखी के चलते बच्चों की सुरक्षा पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। बाल रोग विभाग में खुले में निकले तेज़धार बोल्ट और अव्यवस्थित ढांचा मासूम बच्चों के लिए दुर्घटनाओं का कारण बन सकता है।

खुले में निकले तेज़धार बोल्ट बन सकते हैं हादसे का कारण

बाल रोग विभाग वह जगह होती है, जहां बच्चे इलाज के लिए लाए जाते हैं। लेकिन सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में यह विभाग खुद ही बच्चों के लिए असुरक्षित होता जा रहा है। अस्पताल परिसर में कई जगहों पर तेज़धार बोल्ट और लोहे की नुकीली संरचनाएं खुली पड़ी हैं, जो गंभीर दुर्घटनाओं को न्योता दे रही हैं।

अक्सर बच्चे खेलते-कूदते हैं, भागते हैं, और अगर कोई बच्चा इन बोल्टों पर गिर जाए, तो उसे गंभीर चोटें आ सकती हैं। आंख, मुंह या किसी भी अंग में लगने पर गहरा घाव हो सकता है, जिससे संक्रमण या यहां तक कि जान का भी खतरा हो सकता है।

अभिभावकों की बढ़ती चिंता, प्रशासन मौन

इस मामले को लेकर स्थानीय लोग और अभिभावक बेहद चिंतित हैं। कुछ लोगों का कहना है कि उन्होंने पहले भी अस्पताल प्रशासन से इस ओर ध्यान देने की अपील की थी, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।

एक अभिभावक ने बताया, “हम अपने बच्चों को इलाज के लिए अस्पताल लाते हैं, लेकिन यहां की हालत देखकर लगता है कि अस्पताल खुद ही खतरे की जगह बन चुका है। अगर कोई बच्चा इन नुकीले बोल्टों पर गिर गया तो उसकी हालत गंभीर हो सकती है। प्रशासन को इसे तुरंत ठीक करना चाहिए।”

प्रशासन की लापरवाही: जिम्मेदारी कौन लेगा?

अस्पताल प्रशासन की इस लापरवाही से यह सवाल उठता है कि अगर कोई बड़ा हादसा हो जाता है तो इसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा? क्या प्रशासन किसी बड़ी दुर्घटना का इंतजार कर रहा है?सरकारी अस्पतालों में पहले ही सुविधाओं की कमी रहती है, ऊपर से इस तरह की अनदेखी मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें और बढ़ा रही है। प्रशासन को जल्द से जल्द इस समस्या का समाधान करना चाहिए ताकि किसी भी मासूम की जान खतरे में न पड़े।

क्या कहता है अस्पताल प्रशासन?

इस मुद्दे पर अस्पताल प्रशासन से प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, लेकिन कोई ठोस जवाब नहीं मिला। अगर जल्द ही कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया गया, तो यह लापरवाही किसी बड़े हादसे में बदल सकती है।

निष्कर्ष:

सरकारी अस्पतालों का उद्देश्य जनता को सुरक्षित और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवा देना होता है, लेकिन सुशीला तिवारी हॉस्पिटल में मौजूदा हालात कुछ और ही बयां कर रहे हैं। अस्पताल में बच्चों की सुरक्षा से जुड़ी इस बड़ी चूक पर प्रशासन को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए और आवश्यक सुधार कार्य करवाने चाहिए। अन्यथा, अगर कोई अप्रिय घटना घटती है, तो इसकी ज़िम्मेदारी प्रशासन को ही लेनी होगी।

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