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हल्द्वानी : निजी स्कूलों की मनमानी पर डीएम सख्त,

| January 23, 2026 | 7 months ago | 1 min read

फीस, किताब और यूनिफॉर्म को लेकर जारी किए निर्देश

हल्द्वानी।
जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल ने जनपद में संचालित निजी विद्यालयों द्वारा फीस निर्धारण, महंगी किताबों और यूनिफॉर्म को लेकर मिल रही लगातार शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सख्त निर्देश जारी किए हैं। डीएम ने स्पष्ट किया कि शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के तहत शिक्षा एक परोपकारी गतिविधि है, इसे लाभ कमाने का माध्यम नहीं बनाया जा सकता।


जिलाधिकारी ने कहा कि माननीय न्यायालयों के स्पष्ट आदेश हैं कि कोई भी निजी विद्यालय अभिभावकों को किसी एक विशेष दुकान या प्रकाशन से किताब या यूनिफॉर्म खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता। ऐसा करना अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।
उन्होंने निर्देश देते हुए कहा कि उत्तराखण्ड शासन के प्रचलित शासनादेशों के अनुसार एनसीईआरटी/एससीईआरटी पुस्तकों को प्राथमिकता दी जाए।

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फीस वृद्धि पारदर्शी और औचित्यपूर्ण हो तथा अभिभावकों से संवाद के बाद ही लागू की जाए।
बिना ठोस कारण और स्कूल प्रबंधन समिति (SMC) से परामर्श के बिना कोई भी स्कूल फीस नहीं बढ़ा सकेगा।

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फीस वृद्धि का लिखित रिकॉर्ड और औचित्य पिछले वर्षों के दस्तावेजों के साथ सुरक्षित रखना अनिवार्य होगा।
इसके साथ ही डीएम ने प्रवेश प्रक्रिया को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए कि शैक्षिक सत्र की शुरुआत 1 अप्रैल को जिन बच्चों की आयु 6 वर्ष पूर्ण हो चुकी है, उन्हें ही कक्षा-1 में प्रवेश दिया जाए।


जिलाधिकारी ने मुख्य शिक्षाधिकारी को निर्देश दिए हैं कि जनपद के सभी निजी विद्यालयों में इन आदेशों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। किसी भी स्कूल द्वारा नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।


डीएम ने यह भी साफ कहा कि यूनिफॉर्म के लिए किसी विशेष दुकान या विक्रेता से खरीदने की बाध्यता पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगी। इससे अभिभावकों को राहत मिलेगी और स्कूलों की मनमानी पर रोक

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