राम मंदिर चढ़ावा गबन मामले की सुप्रीम कोर्ट निगरानी में जांच की मांग, ट्रस्ट भंग करने की उठी आवाज

हल्द्वानी। अयोध्या स्थित श्रीरामलला राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़े कथित गबन मामले को लेकर हल्द्वानी में समाजसेवी विशाल वर्मा और पूर्व पार्षद प्रत्याशी अंजलि वर्मा ने गंभीर सवाल उठाए हैं। दोनों ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने की मांग की है।
समाजसेवी विशाल वर्मा ने कहा कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाती है तो यह मामला करोड़ों रुपये के कथित गबन से जुड़ा हो सकता है। उनका आरोप है कि अब तक की कार्रवाई केवल छोटे कर्मचारियों तक सीमित रखी गई है, जबकि बड़े पदाधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका की भी गहन जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि मामले में बड़े नाम सामने आ सकते हैं और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अयोध्या की पावन भूमि पर भ्रष्टाचार और अनैतिकता के लिए कोई स्थान नहीं है तथा करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े इस मामले में पूर्ण पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। साथ ही उन्होंने राम मंदिर ट्रस्ट को भंग कर नई व्यवस्था लागू करने की मांग भी उठाई।
पूर्व पार्षद प्रत्याशी अंजलि वर्मा ने कहा कि यदि भगवान के नाम पर चढ़ाए गए धन में कोई हेराफेरी या चोरी करता है तो यह केवल आर्थिक अपराध नहीं बल्कि करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था के साथ विश्वासघात है। उन्होंने कहा कि ऐसे मामलों में दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
अंजलि वर्मा ने मंदिरों में चढ़ावे की व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाने की वकालत करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं को भी नकद और कीमती वस्तुएं चढ़ाने के दौरान सतर्कता बरतनी चाहिए। उनका मानना है कि डिजिटल और जवाबदेह व्यवस्था से भविष्य में भ्रष्टाचार, चोरी और गबन जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सकती है।
उन्होंने कहा कि यह मामला करोड़ों लोगों की धार्मिक आस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए इसकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच बेहद जरूरी है।
नोट: यह बयान समाजसेवी विशाल वर्मा और पूर्व पार्षद प्रत्याशी अंजलि वर्मा द्वारा लगाए गए आरोपों और मांगों पर आधारित है। संबंधित पक्षों की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।
