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हल्द्वानी पहुंचे GIEAIA महासचिव त्रिलोक सिंह, GIC Re में हिस्सेदारी बिक्री और निजीकरण का किया विरोध

| July 1, 2026 | 2 months ago | 1 min read

हल्द्वानी। ने हल्द्वानी स्थित सामान्य बीमा कार्यालयों का दौरा करते हुए केंद्र सरकार द्वारा GIC Re में अतिरिक्त 5 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा संस्थाओं का निजीकरण राष्ट्रीय हितों के खिलाफ है और सरकार को पूर्णतः सरकारी स्वामित्व वाली एकीकृत महा-बीमा निगम के गठन की दिशा में कदम उठाने चाहिए।

का कहना है कि वर्ष 2017 में 14.22 प्रतिशत और सितंबर 2024 में 3.4 प्रतिशत हिस्सेदारी बिक्री के बाद अब प्रस्तावित 5 प्रतिशत हिस्सेदारी विक्रय से सरकार की हिस्सेदारी घटकर 77.4 प्रतिशत रह जाएगी, जो सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा व्यवस्था को कमजोर करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

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संगठन ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियां और राष्ट्रीय पुनर्बीमाकर्ता केवल व्यावसायिक संस्थाएं नहीं बल्कि देश की सामाजिक सुरक्षा, आर्थिक विकास और जनकल्याणकारी व्यवस्था के महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। ग्रामीण भारत, किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों तथा मध्यम वर्ग को सुरक्षा प्रदान करने में इन संस्थाओं की महत्वपूर्ण भूमिका रही है।

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<p class=GIEAIA ने बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) की अनुमति देने के प्रस्ताव का भी विरोध करते हुए कहा कि बीमा सेवा सामाजिक सुरक्षा से जुड़ा विषय है, जिसे केवल लाभ कमाने के व्यवसाय के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। संगठन के अनुसार विदेशी कंपनियां जनहित की अपेक्षा मुनाफे को प्राथमिकता देती हैं, जिससे देश की वित्तीय संप्रभुता प्रभावित हो सकती है।

संगठन ने बढ़ते प्रीमियम, मानव संसाधनों की कमी, रिक्त पदों पर भर्ती न होने तथा श्रमिक अधिकारों में कटौती जैसे मुद्दों पर भी चिंता व्यक्त की। GIEAIA ने कहा कि लंबे समय से रिक्त पदों को नहीं भरे जाने के कारण कर्मचारियों पर कार्यभार बढ़ रहा है, जिसका असर सेवाओं की गुणवत्ता पर पड़ रहा है।

इस दौरान संगठन ने सार्वजनिक क्षेत्र की चारों सामान्य बीमा कंपनियों के विलय कर एक विशाल सार्वजनिक क्षेत्रीय बीमा निगम के गठन की मांग रखी। इनमें National Insurance Company Limited, United India Insurance Company Limited, The Oriental Insurance Company Limited और The New India Assurance Company Limited शामिल हैं।

GIEAIA ने मांग की कि सार्वजनिक क्षेत्र की सामान्य बीमा कंपनियों और GIC Re के निजीकरण एवं विनिवेश की सभी योजनाओं को तत्काल प्रभाव से रोका जाए, बीमा क्षेत्र में 100 प्रतिशत एफडीआई की अनुमति वापस ली जाए तथा श्रमिक हितों के विपरीत श्रम संहिताओं को निरस्त किया जाए।

संगठन ने कर्मचारियों के हित में तत्काल भर्ती, संविदा कर्मचारियों को नियमित करने, लंबित गैर-मुख्य लाभों का भुगतान तथा चाइल्ड केयर लीव लागू करने की भी मांग उठाई।

महासचिव त्रिलोक सिंह ने कहा कि GIEAIA भविष्य में भी वित्तीय सेवा विभाग, मुख्य श्रम आयुक्त और वित्त मंत्रालय के समक्ष इन मुद्दों को मजबूती से उठाती रहेगी तथा सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए संघर्ष जारी रखेगी।

उन्होंने कहा कि मजबूत सार्वजनिक क्षेत्रीय सामान्य बीमा कंपनियां एक सुरक्षित, आत्मनिर्भर और समावेशी भारत की मजबूत नींव हैं तथा सरकार को इनके संरक्षण और सुदृढ़ीकरण के लिए आवश्यक कदम उठाने चाहिए।

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