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नीली रोशनी से जगमगाया बेस अस्पताल; जागरूकता की रोशनी से बदली सोच

| April 2, 2026 | 3 months ago | 1 min read

हल्द्वानी | 2 अप्रैल 2026

हल्द्वानी के बेस अस्पताल में एक ऐसा दृश्य देखने को मिला, जिसने न सिर्फ इमारत को बल्कि लोगों की सोच को भी रोशन कर दिया।

नेशनल ट्रस्ट में पंजीकृत संस्था ‘रोशनी सोसाइटी’ द्वारा संचालित जिला दिव्यांग पुनर्वास केंद्र (DDRC), नैनीताल के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम ने समाज को एक सकारात्मक और संवेदनशील संदेश दिया।


✨ जागरूकता के साथ संवेदनशीलता का संदेश

कार्यक्रम में ऑटिज्म से प्रभावित बच्चों, उनके अभिभावकों और विशेषज्ञों ने मिलकर एक समावेशी समाज बनाने का संकल्प लिया।

मुख्य अतिथि जिला समाज कल्याण अधिकारी विश्वनाथ गौतम ने सरकारी योजनाओं की जानकारी देते हुए कहा कि दिव्यांगजनों के लिए अवसर और समर्थन लगातार बढ़ाया जा रहा है। वहीं सहायक सीएमओ डॉ. श्वेता भंडारी ने ऑटिज्म को समझने और समय पर इलाज व देखभाल की आवश्यकता पर जोर दिया।


🧠 विशेषज्ञों ने बताया – समय पर पहचान है जरूरी

स्पेशल एजुकेटर विनीता वर्मा ने Early Intervention की अहमियत समझाते हुए कहा कि शुरुआती पहचान बच्चों के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकती है।

रोशनी सोसाइटी के सचिव गोविंद मेहरा ने समाज से अपील की कि ऑटिज्म को बीमारी नहीं, बल्कि एक अलग क्षमता के रूप में देखा जाए।


❤️ अनुभवों ने छुआ दिल

अभिभावक कैलाश जोशी ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि धैर्य, निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन से बच्चे समाज में पूरी तरह सक्षम बन सकते हैं।
उपाध्यक्ष हेमा परगाई ने अभिभावकों के सशक्तिकरण और बच्चों के अधिकारों पर जोर दिया।


🌱 2011 से बदलाव की शुरुआत

संस्था की अध्यक्ष शिवानी पाल ने बताया कि 2011 से शुरू हुई इस पहल ने आज समाज में ऑटिज्म को लेकर समझ और स्वीकार्यता बढ़ाई है।


💙 ‘लाइट इट अप ब्लू’ बना आकर्षण का केंद्र

कार्यक्रम का सबसे भावनात्मक पल तब आया जब बेस अस्पताल का मुख्य भवन नीली रोशनी से जगमगा उठा।
यह ‘Light It Up Blue’ अभियान का हिस्सा था—जो पूरी दुनिया में ऑटिज्म जागरूकता का प्रतीक माना जाता है।

नीली रोशनी ने यह संदेश दिया:
👉 ये बच्चे अलग हैं, लेकिन किसी से कम नहीं
👉 समाज में इनका बराबर हक और सम्मान है


👨‍👩‍👧 बड़ी संख्या में सहभागिता

कार्यक्रम में 80–100 विशेष बच्चों, उनके अभिभावकों और शहर के कई गणमान्य लोगों ने हिस्सा लिया। यह उपस्थिति इस बात का संकेत थी कि समाज अब जागरूक हो रहा है और बदलाव की दिशा में कदम बढ़ा रहा है।


🌟 सकारात्मक संदेश

यह आयोजन सिर्फ एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि एक सोच का परिवर्तन था—
जहां सहानुभूति, समझ और स्वीकार्यता ने मिलकर एक बेहतर समाज की तस्वीर पेश की।

हल्द्वानी से उठी यह नीली रोशनी अब पूरे समाज को जागरूक करने की प्रेरणा बन रही है।

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