Sunday, October 4, 2026 | Loading...
BREAKING NEWS
ज्योलिकोट में स्वास्थ्य सेवाएं जारी, नए पीलिया-डायरिया मामलों में कमी●आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, अधिकारियों को त्वरित राहत के निर्देश●नैनीताल में मौसमी फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, CMO ने अस्पतालों को दिए तैयार रहने के निर्देश●राजपुरा में बढ़ते नशे के कारोबार पर विधायक सुमित हृदयेश ने जताया आक्रोश●SIR प्रक्रिया को लेकर भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने ADM को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग●ज्योलिकोट में स्वास्थ्य सेवाएं जारी, नए पीलिया-डायरिया मामलों में कमी●आपदा प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचे कैबिनेट मंत्री राम सिंह कैड़ा, अधिकारियों को त्वरित राहत के निर्देश●नैनीताल में मौसमी फ्लू को लेकर स्वास्थ्य विभाग अलर्ट, CMO ने अस्पतालों को दिए तैयार रहने के निर्देश●राजपुरा में बढ़ते नशे के कारोबार पर विधायक सुमित हृदयेश ने जताया आक्रोश●SIR प्रक्रिया को लेकर भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने ADM को सौंपा ज्ञापन, निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग

हल्द्वानी में सांस्कृतिक सामरस्य: गोपाल मंदिर से दसकों से मनाते है होलिका दहन

| March 24, 2024 | 3 years ago | 1 min read

नयी बस्ती में स्थित गोपाल मंदिर में हर साल होली के अवसर पर अनूठा दृश्य देखने को मिलता है।

हल्द्वानी, उत्तराखंड: हल्द्वानी के बनभूलपुरा नयी बस्ती में स्थित गोपाल मंदिर में हर साल होली के अवसर पर अनूठा दृश्य देखने को मिलता है। यहाँ पर नहीं सिर्फ हिंदू बल्कि मुस्लिम सभी धर्मों के लोग एक साथ आते हैं और एकत्रित होकर होलिका दहन का उत्सव मनाते हैं।

गोपाल मंदिर के आस-पास रहने वाले लोगों का कहना है कि यहाँ का वातावरण सांस्कृतिक सामरस्य का प्रतीक है। मंदिर के चारों ओर मुस्लिम समुदाय के लोग भी रहते हैं और होली के मौके पर वे भी उत्साह से शामिल होते हैं।


हल्द्वानी में सांस्कृतिक सामरस्य: गोपाल मंदिर से

 /></div>




<p class=होली के इस अवसर पर लोग एक-दूसरे के साथ रंगों का खेल खेलते हैं, परस्पर प्रेम और समरसता का संदेश फैलाते हैं। इसे एक सांस्कृतिक उत्सव के रूप में देखा जा सकता है जो सभी धर्मों के लोगों को एक साथ लाता है और सामूहिक एकता का प्रतीक है।

गोपाल मंदिर के पुजारी ने इस अवसर पर कहा, “हमारी मंदिर में हर साल होली का उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। यहाँ के लोग अनेक धर्मों से हैं, लेकिन हम सभी एक परिवार के रूप में मिलजुलकर खुशियां मनाते हैं।”

यह सांस्कृतिक अनुभव हल्द्वानी की एक अद्वितीयता है जो समाज को एकत्रित करती है और सांस्कृतिक सामरस्य को बढ़ावा देती है।

Link copied to clipboard!