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लंका दहन देखकर दर्शक हुए रोमांचित, महिला रामलीला में उमड़ा जन सैलाब

| April 6, 2026 | 5 months ago | 1 min read

हल्द्वानी के शीशमहल काठगोदाम में एसआरआई संस्था द्वारा आयोजित महिला रामलीला के आठवें दिन ‘लंका दहन’ का भव्य मंचन किया गया, जिसने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। इस दौरान हनुमान जी द्वारा लंका दहन और रावण पुत्र अक्षय कुमार के वध का दृश्य बेहद प्रभावशाली रहा।

रामलीला के इस विशेष प्रसंग में दिखाया गया कि समुद्र पार करने से पहले हनुमान जी अपनी शक्ति को भूल जाते हैं। तब जामवंत उन्हें उनके बल और पराक्रम का स्मरण कराते हैं। इसके बाद हनुमान जी विशाल रूप धारण कर आकाश मार्ग से लंका पहुंचते हैं और अशोक वाटिका में माता सीता की खोज कर उन्हें भगवान श्रीराम की अंगूठी सौंपते हैं।

इसके पश्चात हनुमान जी लंका में उत्पात मचाते हुए रावण के पुत्र अक्षय कुमार का वध करते हैं और पूरी लंका को अग्नि के हवाले कर देते हैं। इस दृश्य के मंचन ने दर्शकों को भाव-विभोर कर दिया। जैसे ही लंका दहन का प्रसंग पूरा हुआ, पंडाल ‘जय श्रीराम’ के जयघोष से गूंज उठा। कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं।

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<h2 class= कलाकारों ने बिखेरा अभिनय का जादू

इस अवसर पर सभी भूमिकाएं महिलाओं द्वारा निभाई गईं, जो महिला सशक्तिकरण का सशक्त उदाहरण बनीं।

  • राम – मानसी रावत
  • लक्ष्मण – अंशिका जीना
  • हनुमान – तनुजा जोशी
  • सुग्रीव – नीलम लोहनी
  • रावण – दीपा कोश्यारी
  • मेघनाथ – मंजू बिष्ट
  • जामवंत – भावना पोखरिया
  • अक्षय कुमार – (कलाकार द्वारा प्रभावशाली प्रस्तुति)

कलाकारों के जीवंत अभिनय और संवाद अदायगी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

सांसद अजय भट्ट ने किया शुभारंभ

कार्यक्रम का शुभारंभ क्षेत्र के सांसद द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। उन्होंने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति, रामायण के आदर्शों और बुराई पर अच्छाई की जीत के संदेश को समाज के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।

उन्होंने एसआरआई संस्था के प्रयासों की सराहना करते हुए हर संभव सहयोग का आश्वासन भी दिया। इस दौरान चेतन सम्मल और मयंक नेगी भी उनके साथ उपस्थित रहे।

महिला सशक्तिकरण का अनूठा उदाहरण

एसआरआई संस्था की संस्थाध्यक्ष तनुजा जोशी ने बताया कि इस महिला रामलीला का उद्देश्य महिलाओं को मंच प्रदान करना और उनके आत्मविश्वास को बढ़ाना है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन महिला सशक्तिकरण का साक्षात उदाहरण है, साथ ही नई पीढ़ी को रामायण के आदर्शों से जोड़ने का प्रयास भी है।

मंच संचालन और सहभागिता

कार्यक्रम का सफल संचालन रिम्पी बिष्ट ने किया। इस दौरान रंगकर्मी और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े कई प्रमुख लोग उपस्थित रहे, जिनमें अनिल घिडियाल, गिरीश चन्द्र तिवारी, मनोज कुमार तिवारी, नीरज तिवारी, दिनेश फुलारा, पुष्पा संभल, संगीत निर्देशक मोहन चन्द्र जोशी, महामंत्री कौशलेंद्र भट्ट, कामिनी पाल, इशिका शर्मा, योगिता बनोला, राधा मिश्रा, मीना डंगवाल, सुरेंद्र रौतेला, योगेश भोज, हर्षवर्धन जोशी, मनोज गुणवंत, विकास राठौर, अजय कुमार, केशव दत्त जोशी, समीर शुक्ला, तारा चन्द्र उप्रेती, गौरव जोशी, वरिष्ठ अधिवक्ता मकरंद प्रताप सिंह, एनडी तिवारी, मोहन चन्द्र बलुटिया, मोहन अधिकारी, नारायण दत्त सनवाल, रमेश, आशीष सहित सैकड़ों श्रद्धालु मौजूद रहे।

निष्कर्ष

महिला रामलीला का यह आयोजन न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक बना, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सांस्कृतिक संरक्षण का भी उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत करता नजर आया। लंका दहन का भव्य मंचन दर्शकों के लिए लंबे समय तक यादगार रहेगा।

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