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भोजनमाताओं का बड़ा आंदोलन

| September 24, 2024 | 2 years ago | 1 min read

29 सितंबर को हल्द्वानी में होगा धरना-प्रदर्शन

हल्द्वानी – उत्तराखंड में भोजनमाताओं द्वारा अपने अधिकारों और समस्याओं को लेकर एक बार फिर से बड़ा आंदोलन होने जा रहा है। प्रोग्रेसिव फूड मदर ऑर्गेनाइजेशन, उत्तराखंड की ओर से 29 सितंबर, रविवार को हल्द्वानी के बुद्ध पार्क में एक विशाल धरना-प्रदर्शन का आयोजन किया जाएगा। यह प्रदर्शन सुबह 10:00 बजे से शुरू होगा, जिसमें प्रदेश भर की भोजनमाताएं अपनी मांगों को लेकर जुटेंगी।

प्रमुख मांगें और संघर्ष की कहानी

भोजनमाताओं का संघर्ष लंबे समय से जारी है। उनके मुख्य मुद्दों में न्यूनतम वेतन का न मिलना और बिना किसी स्पष्ट कारण के विद्यालयों से निकाला जाना शामिल है। उत्तराखंड में वर्तमान समय में भोजनमाताओं को मात्र 3000 रुपये मानदेय दिया जाता है, जोकि अन्य राज्यों की तुलना में बेहद कम है। केरल, तमिलनाडु, पुदुचेरी जैसे राज्यों में भोजनमाताओं को उनसे कहीं अधिक वेतन दिया जाता है।

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अधिकारों के लिए एकजुटता जरूरी

भोजनमाताओं की प्रमुख मांगें हैं कि उन्हें विद्यालय से निकाला न जाए और न्यूनतम वेतन की गारंटी दी जाए। इसके लिए उन्हें एक बड़ी एकजुटता की आवश्यकता होगी। संगठन का मानना है कि जिन राज्यों में ट्रेड यूनियनों ने ईमानदारी और संघर्ष के साथ अपने अधिकारों की मांग की है, वहां भोजनमाताओं को उनका हक मिला है।

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<h2 class=सभी भोजनमाताओं से प्रदर्शन में भागीदारी की अपील

संगठन की महामंत्री ने सभी भोजनमाताओं से अपील की है कि वे 29 सितंबर के प्रदर्शन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लें। इस प्रदर्शन को सफल बनाने की जिम्मेदारी हम सभी की है, इसलिए इसका प्रचार-प्रसार भी सभी भोजनमाताओं द्वारा किया जाए। जो भोजनमाता इस सूचना को पढ़ रही हैं, वे इसे अन्य भोजनमाताओं तक पहुंचाने का भी कष्ट करें।

भोजनमाताओं की मुख्य मांगें

1. सभी स्कूलों में गैस चूल्हे की व्यवस्था की जाए।

2. 26 छात्रों से अधिक संख्या पर दूसरी भोजनमाता का चुनाव किया जाए।

3. विद्यालय विलय की स्थिति में भोजनमाता को अन्य स्कूल में नियुक्त किया जाए।

4. भोजनमाताओं का शोषण और उत्पीड़न बंद हो।

5. भोजनमाताओं को चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी घोषित किया जाए।

6. न्यूनतम वेतन लागू हो।

7. ड्रेस, बोनस और मानदेय का समय से भुगतान हो।

8. भोजनमाताओं से अतिरिक्त काम लेना बंद किया जाए।

9. अक्षय पात्र फाउंडेशन द्वारा बनाये जा रहे भोजन पर रोक लगाई जाए।

29 सितंबर को ऐतिहासिक प्रदर्शन की उम्मीद

इस प्रदर्शन के माध्यम से भोजनमाताएं अपने हक और अधिकारों की मांग को मजबूती से उठाएंगी। संगठन की ओर से यह भी कहा गया है कि यह धरना-प्रदर्शन प्रदेश के सभी भोजनमाताओं के लिए एकजुट होने का सुनहरा अवसर है। अगर इस आंदोलन में सफलता मिलती है, तो आने वाले समय में भोजनमाताओं की स्थिति में व्यापक सुधार हो सकता है।

भोजनमाताओं की यह लड़ाई न केवल उनके वेतन या रोजगार की है, बल्कि यह उनकी गरिमा और सम्मान की भी लड़ाई है। इस प्रदर्शन से यह संदेश जाएगा कि यदि श्रमिक वर्ग एकजुट होता है, तो वह अपने अधिकार प्राप्त कर सकता है। अब देखना होगा कि 29 सितंबर का यह धरना-प्रदर्शन कितना सफल होता है और क्या सरकार उनकी मांगों पर ध्यान देती है या नहीं।

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