Sunday, April 5, 2026 | Loading...
BREAKING NEWS
हल्द्वानी में बागजाला गांव के मुद्दे पर आंदोलन तेज, 6 अप्रैल को DFO कार्यालय पर प्रदर्शन का ऐलानहल्द्वानी में सपा की सियासत गरम — अब्दुल बारी की मुलाकात से बढ़ी अंदरूनी हलचल, 2027 से पहले बड़ा बदलाव या नई कंट्रोवर्सी?हल्द्वानी में महिला रामलीला का भव्य मंचन, मुख्य अतिथि ललित जोशी रहे आकर्षण का केंद्रग्रामीण सुरक्षा को लेकर उठी आवाज, जंगली जानवरों से बचाव के लिए ठोस कदमों की मांगमानसून से पहले प्रशासन अलर्ट — नदियों की सफाई और बाढ़ सुरक्षा पर फोकसहल्द्वानी में बागजाला गांव के मुद्दे पर आंदोलन तेज, 6 अप्रैल को DFO कार्यालय पर प्रदर्शन का ऐलानहल्द्वानी में सपा की सियासत गरम — अब्दुल बारी की मुलाकात से बढ़ी अंदरूनी हलचल, 2027 से पहले बड़ा बदलाव या नई कंट्रोवर्सी?हल्द्वानी में महिला रामलीला का भव्य मंचन, मुख्य अतिथि ललित जोशी रहे आकर्षण का केंद्रग्रामीण सुरक्षा को लेकर उठी आवाज, जंगली जानवरों से बचाव के लिए ठोस कदमों की मांगमानसून से पहले प्रशासन अलर्ट — नदियों की सफाई और बाढ़ सुरक्षा पर फोकस

Gateway of Kumaon

| March 10, 2024 | 2 years ago | 1 min read

हल्द्वानी (Haldwani), कुमाऊं (Kumaon) का सबसे बड़ा शहर है, जो उत्तराखंड राज्य (Uttarakhand) के नैनीताल (Nainital) जिले में स्थित है और इसके आठ अनुमंडलों में से एक है. यह उत्तराखंड में तीसरा सबसे अधिक आबादी वाला शहर और सबसे बड़ा वाणिज्यिक बाजार भी है. हल्द्वानी को उत्तराखंड की आर्थिक राजधानी भी कहा जाता है (Haldwani, Financial Capital of Uttarakhand). यहां राज्य की सबसे अधिक वाणिज्यिक, आर्थिक और औद्योगिक गतिविधियां होती हैं. यह शहर गौला नदी (Gaula River) के तट पर हिमालय की तलहटी में भाभर क्षेत्र में स्थित है.

2011 की जनगणना के मुताबिक हल्द्वानी शहर की जनसंख्या 2,32,060 है (Haldwani Population). यह देहरादून, हरिद्वार और रुड़की के बाद उत्तराखंड में चौथा सबसे अधिक आबादी वाला शहर है. कुमाऊं हिमालय की तलहटी में स्थित होने के कारण, हल्द्वानी से लगे काठगोदाम (Kathgodam) को .कुमाऊं का प्रवेश द्वार’ के रूप में जाना जाता है (Gateway of Kumaon).

हल्द्वानी शहर की स्थापना 1834 में पहाड़ी लोगों के लिए एक मार्ट के रूप में की गई थी, जो ठंड के मौसम में भाबर का दौरा करते थे. 1882 में बरेली-नैनीताल प्रांतीय सड़क की स्थापना और 1884 में रोहिलकुंड और कुमाऊं रेलवे द्वारा भोजीपुरा-काठगोदाम रेलवे लाइन की स्थापना ने शहर को एक प्रमुख व्यापारिक केंद्र बना दिया. इसे कुमाऊं के पहाड़ी क्षेत्रों और भारत-गंगा के मैदानों के बीच एक केंद्र के रूप में विकसित किया गया (Haldwani City).

Link copied to clipboard!