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पैगंबर मुहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी बर्दाश्त नहीं

| October 5, 2024 | 1 year ago | 1 min read

उलमा का विरोध प्रदर्शन

सम्भल, उत्तर प्रदेश – आज सुबह 10 बजे सम्भल के तेल मंडी स्थित मरकज़ी मदरसा अहले सुन्नत अजमल उल उलूम में एक विशेष बैठक आयोजित की गई, जिसमें शहर के प्रमुख उलमा, मुफ़्ती और विद्वान इकट्ठा हुए। इस बैठक की अध्यक्षता मुफ़्ती-ए-आज़म सम्भल मुफ़्ती अलाउद्दीन अजमली और क़ारी तनज़ीम अशरफ़ अजमली ने की। बैठक का मुख्य उद्देश्य हाल ही में यति नरसिंहानंद द्वारा ग़ाज़ियाबाद में पैगंबर मुहम्मद साहब के खिलाफ दिए गए अपमानजनक बयान की निंदा करना था।n

पैगंबर की शान में अपमान सहन नहीं: मुफ़्ती अलाउद्दीन अजमली

बैठक में प्रमुख रूप से मुफ़्ती अलाउद्दीन अजमली ने कहा कि पैगंबर मुहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयान न केवल मुसलमानों की भावनाओं को ठेस पहुँचाते हैं, बल्कि इससे भारत की एकता और अखंडता को भी नुकसान पहुँचता है।

वैश्विक स्तर पर है मुसलमानों की भावना का सवाल: क़ारी तनज़ीम अशरफ़

क़ारी तनज़ीम अशरफ़ अजमली ने भी यति नरसिंहानंद के बयान की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि पैगंबर मुहम्मद साहब के मानने वाले केवल भारत में ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में हैं। यह मामला सिर्फ भारत का नहीं है, बल्कि यह पूरे विश्व के मुसलमानों की भावनाओं को आहत करने का है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के बयानों से धार्मिक सौहार्द्रता और शांति को खतरा हो सकता है।

बार-बार की जाती है पैगंबर की शान में गुस्ताखी: मुफ़्ती आलम नूरी

मुफ़्ती आलम नूरी ने अपने वक्तव्य में कहा कि भारत में बार-बार पैगंबर मुहम्मद साहब की शान में गुस्ताखी की जाती रही है, जो देश की एकता और भाईचारे को कमजोर करने का प्रयास है। उन्होंने सरकार से इस मामले में सख्त कार्रवाई की मांग की, ताकि भविष्य में इस तरह के अपमानजनक बयान न दिए जा सकें।

हिन्दू-मुस्लिम में फूट डालने की साजिश: क़ारी वसी अशरफ़

क़ारी वसी अशरफ़ ने यति नरसिंहानंद पर आरोप लगाया कि वह इस तरह के बयानों से हिन्दू और मुसलमानों के बीच आपसी फूट डालने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के विवादित बयान जानबूझकर सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए दिए जाते हैं और ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई होनी चाहिए।

भारत की छवि को हो रहा नुकसान: तक़ी अशरफ़ एडवोकेट

तक़ी अशरफ़ एडवोकेट ने कहा कि इस तरह के बयान भारत की अंतर्राष्ट्रीय छवि को नुकसान पहुंचाते हैं। भारत एक ऐसा देश है जहां सभी धर्मों के लोग एक-दूसरे का सम्मान करते हैं। उन्होंने बताया कि यति नरसिंहानंद पहले भी कई बार इस तरह के बयान दे चुके हैं, लेकिन अब तक उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है।

राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन

बैठक के बाद सभी उलमा और विद्वानों का एक जत्था उप-ज़िलाधिकारी कार्यालय पहुंचा और वहां राष्ट्रपति और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में यति नरसिंहानंद के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की गई, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हो सकें और देश में सांप्रदायिक सौहार्द बना रहे।

उपस्थित रहे प्रमुख उलमा और विद्वान

इस मौके पर मुफ़्ती अशफ़ाक़ नईमी, मुफ़्ती नूर आलम, मुफ़्ती अहमद रज़ा, मौलाना मेहबूब वास्ती, मौलाना याक़ूब, मुफ़्ती आफताब रज़ा, मौलाना हसीब अख़्तर, मौलाना इमरान मनज़री, मौलाना शमशाद मिस्बाही, मौलाना उमर नईमी, मौलाना मुहम्मद हुसैन, मौलाना माहे आलम, मौलाना ग़ुलाम मुस्तफ़ा, क़ारी शुऐब अशरफ़ी, क़ारी शौकत, क़ारी शाहिद, क़ारी सरताज, क़ारी सलमान, क़ारी ज़ाहिद, क़ारी साजिद, हाफ़िज़ अब्दुल मन्नान, हाफ़िज़ अब्दुल शकूर, सय्यद अब्दुल क़दीर, सरफ़राज़ याक़ूब, क़ानूनी सलाहकार फ़रीद अहमद एडवोकेट, मुहम्मद अहमद नौशाही, मास्टर इस्माईल सहित अन्य प्रमुख लोग उपस्थित थे।

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