सूरजकुंड झूला हादसा: सिस्टम की लापरवाही ने ली जान, अब जिम्मेदारों के नाम भी सामने
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📍हल्द्वानी | विशेष रिपोर्ट
हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में 8 फरवरी 2024 को हुई घटना को अब दो वर्ष पूरे हो चुके हैं, लेकिन उस दिन की घटनाएं आज भी लोगों की यादों में ताजा हैं। उस दिन अचानक बिगड़े हालात, हिंसा और तनावपूर्ण माहौल में 7 लोगों की मौत हुई थी, जबकि बड़ी संख्या में लोग घायल हुए। घटना के दौरान कानून-व्यवस्था संभालने में जुटे कई पुलिस कर्मी भी घायल हुए थे।

दो साल बाद भी यह घटना केवल एक पुरानी खबर नहीं, बल्कि कई सवालों और यादों के साथ चर्चा में बनी हुई है।घटना उस समय हुई जब क्षेत्र में प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान माहौल तनावपूर्ण हो गया था। देखते ही देखते स्थिति बिगड़ गई और कई स्थानों पर झड़प, पत्थरबाजी और आगजनी की घटनाएं सामने आईं। हालात को नियंत्रित करने के लिए अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करना पड़ा और क्षेत्र में सख्त सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई।

उस दिन की घटनाओं का असर लंबे समय तक पूरे शहर में महसूस किया गया।घटना के बाद कानून-व्यवस्था बनाए रखने और मामले की जांच के तहत बड़े स्तर पर कार्रवाई की गई। विभिन्न मामलों में करीब 105 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 5 महिलाएं भी शामिल थीं। कई आरोपितों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया।

जानकारी के अनुसार, दो साल बीत जाने के बाद भी कुछ लोग अब तक जेल में हैं और मामले से जुड़ी न्यायिक प्रक्रिया जारी है। यह भी इस घटना का एक महत्वपूर्ण पहलू है, क्योंकि कई परिवार आज भी कानूनी प्रक्रिया के समाप्त होने का इंतजार कर रहे हैं।इस घटना में हुई 7 मौतों को लेकर समय-समय पर चर्चा होती रही है।

घटना के बाद शासन स्तर पर मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए मजिस्ट्रेट जांच के आदेश दिए गए थे और निर्देश दिया गया था कि जांच 15 दिनों के भीतर पूरी कर रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराई जाए।

उस समय लोगों को उम्मीद थी कि जांच के बाद पूरी स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। हालांकि समय बीतने के साथ आमजन के बीच यह जिज्ञासा बनी रही कि उस दिन हुई मौतों की परिस्थितियों की पूरी तस्वीर कब सामने आएगी।बनभूलपुरा की यह घटना कई मायनों में अहम मानी जाती है, क्योंकि इसका प्रभाव केवल उस दिन तक सीमित नहीं रहा। घटना के बाद लंबे समय तक क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही और सामाजिक माहौल पर भी इसका असर देखा गया। कई परिवारों ने अपनों को खोया, कई लोग घायल हुए और पुलिस कर्मियों को भी चोटें आईं। इस तरह यह घटना समाज के कई वर्गों को प्रभावित करने वाली साबित हुई।

विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी घटनाएं केवल कानून-व्यवस्था का विषय नहीं होतीं, बल्कि इनके सामाजिक और मानवीय पहलू भी लंबे समय तक असर छोड़ते हैं। इसलिए जांच और न्यायिक प्रक्रिया का समय पर और पारदर्शी तरीके से पूरा होना जरूरी माना जाता है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं से सबक लिया जा सके और किसी भी प्रकार की गलतफहमी या अफवाह को जगह न मिले।
दो साल बाद भी बनभूलपुरा की घटना एक ऐसी याद बनकर सामने आती है, जिसने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी। आज भी लोगों की नजर इस बात पर है कि जांच और न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद उस दिन की घटनाओं से जुड़े सभी पहलू स्पष्ट रूप से सामने आएं, ताकि इस अध्याय का समापन सच्चाई और न्याय के साथ हो सके।
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