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कालाढूंगी हादसे में बड़ी चूक: जीवित महिला को मृत घोषित कर भेज दिया पोस्टमार्टम, पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल

| June 19, 2026 | 7 hours ago | 1 min read

हल्द्वानी/कालाढूंगी, 19 जून। कालाढूंगी में हुए दर्दनाक सड़क हादसे के बाद पुलिस और प्रशासनिक व्यवस्था की एक बड़ी लापरवाही सामने आई है। हादसे में घायल एक महिला को मृत मानकर उसका पंचनामा भर दिया गया और पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया, जबकि वह महिला जीवित थी और अस्पताल में उपचाराधीन थी। मामले का खुलासा तब हुआ जब हल्द्वानी पोस्टमार्टम हाउस में मृतकों की पहचान को लेकर विवाद खड़ा हो गया। इस घटना ने पुलिस की पहचान प्रक्रिया और आपदा प्रबंधन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के अनुसार बुधवार रात नैनीताल से घूमकर मेरठ लौट रहे पर्यटकों की एक कार कालाढूंगी से लगभग एक किलोमीटर पहले अनियंत्रित होकर गहरी खाई में जा गिरी। हादसा इतना भीषण था कि वाहन में सवार लोगों में चीख-पुकार मच गई। स्थानीय लोगों, पुलिस और राहत-बचाव टीमों ने मौके पर पहुंचकर घायलों को बाहर निकाला और अस्पताल पहुंचाया।

हादसे में कुल 29 लोग घायल हुए थे, जबकि दो महिलाओं की मौत होने की सूचना सामने आई थी। प्रारंभिक स्तर पर पुलिस ने मृतकों की पहचान नाजरीन (30 वर्ष), पत्नी शाकिर, निवासी शकूरनगर, लिसाड़ी गेट, मेरठ और फरद बेगम (40 वर्ष) के रूप में की थी। इसी आधार पर पंचनामा तैयार कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए हल्द्वानी भेज दिया गया।

हालांकि गुरुवार सुबह हल्द्वानी के पोस्टमार्टम हाउस में उस समय स्थिति बदल गई जब मृतकों के नामों को लेकर परिजनों और अधिकारियों के बीच भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई। जांच और दस्तावेजों के मिलान के दौरान पता चला कि फरद बेगम जीवित हैं और उनका उपचार चल रहा है। वहीं जिस महिला की हादसे में वास्तव में मृत्यु हुई थी, वह शहनाज (32 वर्ष), पत्नी नफीस, निवासी ताला फैक्ट्री क्षेत्र, मेरठ थीं।

इस खुलासे के बाद पोस्टमार्टम हाउस में करीब 20 मिनट तक अफरा-तफरी और हंगामे की स्थिति बनी रही। परिजनों ने भी पहचान प्रक्रिया में हुई चूक पर नाराजगी जताई। बाद में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने दस्तावेजों में आवश्यक संशोधन कर सही पहचान के आधार पर पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कराई।

मामले ने उस समय और तूल पकड़ लिया जब यह सामने आया कि पुलिस की ओर से जारी आधिकारिक प्रेस नोट में भी मृतक और घायल महिला की जानकारी गलत दर्ज की गई थी। प्रेस नोट में जिस महिला को मृत बताया गया था, वह जीवित निकली, जबकि मृतक महिला का नाम अलग था। यह प्रेस नोट विभिन्न मीडिया समूहों और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर प्रसारित हो चुका था, जिससे भ्रम की स्थिति और बढ़ गई।

सूत्रों के अनुसार मामला जब एसपी सिटी हल्द्वानी मनोज कुमार कत्याल के संज्ञान में आया तो उन्होंने इसे गंभीर लापरवाही माना और संबंधित अधिकारियों को कड़ी फटकार लगाई। इसके बाद पुलिस विभाग द्वारा पहले जारी प्रेस नोट को हटाया गया और संशोधित प्रेस नोट जारी किया गया। हालांकि तब तक गलत सूचना कई मीडिया प्लेटफॉर्म और समाचार समूहों तक पहुंच चुकी थी।

एसपी सिटी मनोज कुमार कत्याल ने कहा कि यह एक गंभीर त्रुटि है और ऐसी लापरवाही दोबारा न हो, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि इस प्रकार की लापरवाही सामने आती है तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जाएगी।

दूसरी ओर, हल्द्वानी के सुशीला तिवारी अस्पताल (एसटीएच) के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. अरुण जोशी ने बताया कि हादसे में घायल सभी लोगों का उपचार किया गया। उनकी स्थिति अब पहले से बेहतर है और प्राथमिक उपचार के बाद अधिकांश घायलों को गुरुवार को अस्पताल से छुट्टी देकर घर भेज दिया गया।

हादसे में घायल लोगों में सामिर, जसीम अहमद, सुहैया, फिजा उर रहमान, ऐना, अबुजर, तस्बिया, अनिस, रूकसान, अमन, मोनिस, नवाब, रेशमा, हैदर आसिफ, बबलू, सना, लाइवा, कुलविया, नईमुद्दीन, माहिरा, आईशा, जुनेरा, फरद बेगम, साद तथा चालक सहजाद नईम सहित कई अन्य लोग शामिल थे। सभी घायलों का इलाज विभिन्न अस्पतालों में किया गया।

यह घटना केवल एक प्रशासनिक गलती नहीं, बल्कि आपदा और दुर्घटना प्रबंधन व्यवस्था में मौजूद खामियों को भी उजागर करती है। किसी जीवित व्यक्ति को मृत घोषित कर देना न केवल उसके परिवार के लिए मानसिक आघात का कारण बन सकता है, बल्कि यह पहचान और दस्तावेजी प्रक्रिया में सुधार की आवश्यकता को भी दर्शाता है।

अब सवाल यह उठ रहा है कि आखिर इतनी बड़ी चूक कैसे हुई? क्या घायलों और मृतकों की पहचान में पर्याप्त सावधानी नहीं बरती गई? क्या घटनास्थल पर मौजूद अधिकारियों ने सत्यापन की प्रक्रिया पूरी नहीं की? इन सवालों के जवाब तलाशना और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी।

फिलहाल पुलिस विभाग ने अपनी गलती सुधार ली है, लेकिन इस घटना ने आम लोगों के बीच व्यवस्था की विश्वसनीयता को लेकर कई प्रश्न खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों और सामाजिक संगठनों ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जिम्मेदारी तय करने और पहचान प्रक्रिया को और अधिक मजबूत बनाने की मांग की है।

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