बड़ी कार्रवाई: हल्द्वानी-नैनीताल के 17 स्कूलों को नोटिस, महंगी किताबों और अवैध फीस पर जिला प्रशासन का डंडा
हल्द्वानी/नैनीताल | 2 मई 2026
नैनीताल जिले में निजी स्कूलों की मनमानी और अभिभावकों के आर्थिक शोषण के खिलाफ जिला प्रशासन ने अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। जिलाधिकारी ललित मोहन रयाल के सख्त रुख के बाद, मुख्य शिक्षा अधिकारी (CEO) गोविंद राम जायसवाल ने क्षेत्र के 17 नामी निजी स्कूलों को कारण बताओ नोटिस जारी कर हड़कंप मचा दिया है।
क्यों हुई कार्रवाई? (मुख्य अनियमितताएं)
जांच में यह पाया गया कि कई स्कूल शिक्षा के नाम पर व्यापार कर रहे हैं। मुख्य आरोप निम्नलिखित हैं:

- महंगी किताबों का बोझ: NCERT के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी पुस्तकें जबरन थोपना। कई कक्षाओं में किताबों का सेट सामान्य से 3 गुना तक महंगा पाया गया।
- कमीशन का खेल: अभिभावकों पर विशेष दुकानों या वेंडरों से ही सामान खरीदने का दबाव बनाना।
- पारदर्शिता का अभाव: स्कूल की वेबसाइट पर फीस स्ट्रक्चर और बुक लिस्ट सार्वजनिक न करना।
- नियमों का उल्लंघन: RTI 2009, CBSE गाइडलाइंस और कंज्यूमर प्रोटेक्शन एक्ट 2019 की धज्जियां उड़ाना।
इन 17 स्कूलों पर गिरी गाज
प्रशासन ने हल्द्वानी, रामनगर और भीमताल के इन प्रमुख स्कूलों को नोटिस थमाया है:
देवभूमि सीनियर सेकेंडरी, गुरु द्रोणा पब्लिक स्कूल, लक्ष्य इंटरनेशनल, बीएलएम एकेडमी, वुडब्रिज भीमताल, मल्लिकार्जुन स्कूल, सेंट जोसेफ कॉन्वेंट (रामनगर), ग्रेट मिशन, गार्डन वैली, आर्यमन विक्रम बिड़ला, दून पब्लिक स्कूल, विस्डम पब्लिक स्कूल, इंस्पिरेशन सीनियर सेकेंडरी, एसकेएम स्कूल, किंग्सफोर्ड, शेमफोर्ड मोटाहल्दू और हिमालया विद्या मंदिर।
CEO के सख्त निर्देश: 15 दिन का अल्टीमेटम
मुख्य शिक्षा अधिकारी ने दो टूक शब्दों में स्कूलों को सुधार की चेतावनी दी है:
- संशोधित लिस्ट: 15 दिन के भीतर महंगी किताबों को हटाकर नई बुक लिस्ट जारी करें।
- वेंडर प्रथा खत्म: किसी खास दुकान से किताब खरीदने की अनिवार्यता तुरंत खत्म हो।
- रिफंड/समायोजन: यदि किसी अभिभावक से अतिरिक्त शुल्क लिया गया है, तो उसे वापस करें या अगली फीस में एडजस्ट करें।
- सार्वजनिक जानकारी: फीस और बुक लिस्ट को वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड करें।
चेतावनी: रद्द हो सकती है मान्यता
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि यदि 15 दिनों के भीतर निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो स्कूलों पर भारी जुर्माना लगाने के साथ-साथ उनकी मान्यता निलंबन (De-recognition) की कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
अभिभावकों की जीत: जिला प्रशासन के इस कदम का स्थानीय अभिभावकों ने स्वागत किया है। इसे शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाने और ‘शिक्षा माफिया’ पर लगाम लगाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
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