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नई दिल्ली: पेरिस ओलंपिक 2024 भारतीय खेल इतिहास में एक मिलाजुला अनुभव साबित हुआ। खेलों के इस महाकुंभ में भारत ने बड़े पैमाने पर निवेश किया, 117 एथलीट्स की ट्रेनिंग पर लगभग 470 करोड़ रुपए खर्च किए गए। लेकिन इस भारी-भरकम खर्च के बावजूद भारत के खाते में सिर्फ 6 मेडल आए। इस हिसाब से देखा जाए तो एक मेडल की कीमत देश को 78.33 करोड़ रुपए पड़ी।
इस ओलंपिक में भारत का प्रदर्शन पूरी तरह से मिश्रित रहा। एक ओर जहां नीरज चोपड़ा, मनु भाकर, स्वप्निल कुसाले, सरबजोत सिंह, अमन सहरावत और भारतीय हॉकी टीम ने मेडल जीतकर देश का नाम रोशन किया, वहीं दूसरी ओर कई खिलाड़ी चौथे स्थान पर रहे और कुछ खिलाड़ी अपनी उम्मीदों के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर पाए।
26 जुलाई से 11 अगस्त तक चले पेरिस ओलंपिक 2024 में भारत के 117 एथलीट्स ने 16 खेलों में हिस्सा लिया। इसमें से नीरज चोपड़ा ने एक बार फिर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाते हुए भारत के लिए गोल्ड मेडल जीता। नीरज का प्रदर्शन उनकी लगातार कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम रहा है। वहीं, शूटिंग में मनु भाकर और स्वप्निल कुसाले ने सिल्वर और ब्रॉन्ज मेडल जीते, जिससे भारत को इस खेल में भी उम्मीदें बनी रहीं।
सरबजोत सिंह ने बैडमिंटन में अपनी दमदार वापसी करते हुए कांस्य पदक जीता, जबकि कुश्ती में अमन सहरावत ने सिल्वर मेडल जीता। भारतीय हॉकी टीम ने भी अपने प्रदर्शन को बेहतर करते हुए ब्रॉन्ज मेडल हासिल किया।
यह चिंता का विषय है कि इतनी भारी निवेश के बाद भी भारत को अपेक्षाकृत कम मेडल मिले। 470 करोड़ रुपए का खर्चा और सिर्फ 6 मेडल – यह आंकड़ा भविष्य की योजनाओं और खेल नीतियों की समीक्षा की जरूरत को उजागर करता है।
विशेषज्ञों का मानना है कि मेडल की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण है एथलीट्स का मनोबल और उनका प्रदर्शन। हालांकि, खेलों में निवेश जरूरी है, लेकिन इसके साथ ही हमें उस निवेश का सही उपयोग भी सुनिश्चित करना होगा। एथलीट्स की ट्रेनिंग, उनकी मेंटल हेल्थ, उनकी डायट, और उनके उपकरणों की क्वालिटी पर ध्यान देना जरूरी है।
पिछले ओलंपिक में मिले अनुभव को ध्यान में रखते हुए, पेरिस ओलंपिक में कई सुधार किए गए थे, लेकिन फिर भी मेडल की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि नहीं हो पाई। इस बात को ध्यान में रखते हुए भविष्य की रणनीतियों को और भी अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता है।
पेरिस ओलंपिक 2024 के परिणामों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय खेल संघ और सरकार को अपनी नीतियों में बदलाव की जरूरत है। खिलाड़ियों की ट्रेनिंग के साथ-साथ उनके मनोबल को बढ़ाने पर भी ध्यान देना होगा।
इसके अलावा, हमें नए और प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की खोज पर भी काम करना होगा ताकि उन्हें शुरुआत से ही सही ट्रेनिंग और सपोर्ट मिल सके।इस ओलंपिक में मिले अनुभवों से सीखते हुए, अगले ओलंपिक के लिए बेहतर तैयारी और रणनीतियां बनाई जाएंगी। एथलीट्स के लिए सुविधाओं में सुधार और उनकी प्रदर्शन क्षमता को बढ़ाने के लिए नए तकनीकी साधनों का भी उपयोग किया जाएगा।
भारत के खेल मंत्री ने कहा है कि आने वाले वर्षों में सरकार खेल के बुनियादी ढांचे और एथलीट्स के प्रशिक्षण कार्यक्रमों पर ध्यान केंद्रित करेगी। इसके साथ ही, खेलों में पारदर्शिता और एथलीट्स की स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए भी कदम उठाए जाएंगे।
पेरिस ओलंपिक 2024 भारत के लिए एक मिश्रित अनुभव रहा, जहां मेडल की संख्या में ज्यादा वृद्धि नहीं हो पाई, लेकिन इससे हमें यह भी समझने का मौका मिला कि हमें कहां सुधार की जरूरत है। 470 करोड़ रुपए का निवेश और सिर्फ 6 मेडल का हासिल होना यह दिखाता है कि हमें खेल में दीर्घकालिक सुधार की आवश्यकता है।
अगले ओलंपिक में भारत की संभावनाओं को देखते हुए, यह कहा जा सकता है कि हमारे एथलीट्स में क्षमता की कोई कमी नहीं है, लेकिन उन्हें और भी अधिक समर्थन और संसाधनों की जरूरत है। अगर सही दिशा में प्रयास किए जाएं तो भविष्य में भारत के लिए ओलंपिक में मेडल की संख्या बढ़ाना संभव है।
आशा है कि आने वाले वर्षों में भारतीय एथलीट्स और भी बेहतरीन प्रदर्शन करेंगे और अगले ओलंपिक में देश के लिए और अधिक मेडल लेकर आएंगे।
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