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चंपावत में सोलर प्लांट योजना अटकी, महिलाओं पर बढ़ा कर्ज का बोझ

| February 14, 2026 | 2 months ago | 0 min read

मुख्यमंत्री घोषणा के तहत स्वरोजगार से जुड़ी महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई सोलर प्लांट योजना फिलहाल अधर में लटकती नजर आ रही है। योजना के तहत जिले के गड़कोट, भगिना और लाडोन गांवों में सोलर प्लांट तो स्थापित कर दिए गए, लेकिन बिजली उत्पादन के बाद उसे ग्रिड से जोड़ने का कार्य अब तक पूरा नहीं हो सका है।

मुख्यमंत्री द्वारा चंपावत दौरे के दौरान इस योजना की घोषणा की गई थी, जिसका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को सौर ऊर्जा के माध्यम से आय का स्थायी स्रोत उपलब्ध कराना था। इस संबंध में जानकारी मुख्यमंत्री के आधिकारिक फेसबुक पेज पर भी साझा की गई थी। योजना से जुड़ी महिलाओं ने सरकारी घोषणा और प्रशासन के आश्वासन पर भरोसा करते हुए बैंकों से ऋण लेकर सोलर प्लांट स्थापित किए।

स्थानीय लोगों के अनुसार, प्लांट से उत्पादित बिजली को ग्रिड से जोड़ने के लिए पोल और विद्युत लाइन बिछाने का कार्य अधूरा रह गया है। बताया जा रहा है कि उत्तराखंड अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (उरेडा) द्वारा उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) को आवश्यक धनराशि स्वीकृत नहीं की गई, जिसके चलते काम रुक गया।

इस संबंध में यूपीसीएल अधिकारियों का कहना है कि उन्हें अभी तक उरेडा की ओर से धनराशि प्राप्त नहीं हुई है। अधिकारियों के अनुसार, जैसे ही भुगतान प्राप्त होगा, बिजली लाइन बिछाने का शेष कार्य तुरंत शुरू कर दिया जाएगा।दूसरी ओर, योजना से जुड़ी महिलाओं और अन्य लाभार्थियों की आर्थिक स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। करोड़ों रुपये का बैंक ऋण लेकर लगाए गए सोलर प्लांट से अभी तक कोई आय शुरू नहीं हो सकी है, जबकि हर महीने लाखों रुपये की ईएमआई का भुगतान करना पड़ रहा है।

कई परिवारों को आर्थिक संकट के चलते अन्य संपत्तियां गिरवी रखने की नौबत आ गई है।लाभार्थी महिलाओं का कहना है कि उन्होंने सरकार की योजना पर विश्वास कर निवेश किया, लेकिन विभागीय समन्वय की कमी का खामियाजा अब उन्हें भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीणों और लाभार्थियों ने सरकार से जल्द हस्तक्षेप कर समस्या का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो वे आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।

स्थानीय लोगों का आरोप है कि विभागों के बीच समन्वय की कमी और लापरवाही के कारण एक अच्छी योजना का लाभ जमीनी स्तर पर नहीं मिल पा रहा है, जिससे आम जनता आर्थिक संकट में फंस गई है।

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