Sunday, April 5, 2026 | Loading...
BREAKING NEWS
सरकारी नौकरी घोटाले के चर्चित नाम हाकम सिंह रावत को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी क्लीन चिटउत्तराखंड में शस्त्र लाइसेंस पर सख्ती: ट्रांसफर, नए परमिट और कारतूस उपयोग तक की होगी गहन जांचहल्द्वानी में बागजाला गांव के मुद्दे पर आंदोलन तेज, 6 अप्रैल को DFO कार्यालय पर प्रदर्शन का ऐलानहल्द्वानी में सपा की सियासत गरम — अब्दुल बारी की मुलाकात से बढ़ी अंदरूनी हलचल, 2027 से पहले बड़ा बदलाव या नई कंट्रोवर्सी?हल्द्वानी में महिला रामलीला का भव्य मंचन, मुख्य अतिथि ललित जोशी रहे आकर्षण का केंद्रसरकारी नौकरी घोटाले के चर्चित नाम हाकम सिंह रावत को बड़ी राहत, कोर्ट ने दी क्लीन चिटउत्तराखंड में शस्त्र लाइसेंस पर सख्ती: ट्रांसफर, नए परमिट और कारतूस उपयोग तक की होगी गहन जांचहल्द्वानी में बागजाला गांव के मुद्दे पर आंदोलन तेज, 6 अप्रैल को DFO कार्यालय पर प्रदर्शन का ऐलानहल्द्वानी में सपा की सियासत गरम — अब्दुल बारी की मुलाकात से बढ़ी अंदरूनी हलचल, 2027 से पहले बड़ा बदलाव या नई कंट्रोवर्सी?हल्द्वानी में महिला रामलीला का भव्य मंचन, मुख्य अतिथि ललित जोशी रहे आकर्षण का केंद्र

हल्द्वानी में सुप्रीम कोर्ट आदेश के बावजूद संपत्ति खरीद-फरोख्त?

| August 3, 2025 | 8 months ago | 1 min read

हल्द्वानी में सुप्रीम कोर्ट का आदेश

हल्द्वानी के बनभूलपुरा क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट ने पिछले दिनों स्पष्ट निर्देश दिए थे कि “यथास्थिति बनी रहे, कोई नया निर्माण या संपत्ति की खरीद-फरोख्त न की जाए।” यह आदेश रेलवे भूमि विवाद को लेकर दिया गया था, ताकि किसी भी प्रकार की कानूनी और सामाजिक स्थिति और न बिगड़े।


सूत्रों के हवाले से चौंकाने वाली जानकारी

अब, सूत्रों के मुताबिक, इस आदेश का फायदा उठाते हुए इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि विवादित क्षेत्र के आसपास मकानों की डीलिंग कैश में हो रही है। कहा जा रहा है कि कुछ लोग इस स्थिति का फायदा उठाकर ब्लैक मनी को व्हाइट करने के लिए मकान खरीद-बेच रहे हैं।


कथित भू-माफिया और पुराने मामले

खबर है कि इस पूरे खेल में कुछ ऐसे लोग भी शामिल हो सकते हैं, जिनके नाम पहले विवादों में रहे हैं। सूत्रों का दावा है कि हल्द्वानी का एक कथित भू-माफिया, जिसकी कुछ जमीनें नगर निगम ने पहले अपने कब्जे में ली थीं, और एक प्रॉपर्टी डीलर जिसने देहरादून में करीब 30 लाख रुपये का कथित फ्रॉड किया था, फिर से सक्रिय हो सकते हैं। हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।


प्रशासन और सरकार के लिए बड़ा सवाल

यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह न केवल सुप्रीम कोर्ट के आदेश की अवमानना होगी, बल्कि बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताओं का मामला भी बन सकता है। सवाल यह है कि प्रशासन और कानून-व्यवस्था की आंखों के सामने यह सब हो रहा है या फिर संबंधित विभागों को जानकारी ही नहीं है?


स्थानीय निवासियों का कहना है कि अगर ऐसी गतिविधियां जारी रहीं, तो क्षेत्र में तनाव और बढ़ सकता है। साथ ही, जिन लोगों ने पहले से ही कानूनी दायरों में रहकर घर बनाए हैं, वे भी असमंजस की स्थिति में हैं।

स्थानीय लोगों की चिंता


जांच की जरूरत

यह मामला निश्चित रूप से जांच का विषय है। जनता की उम्मीद है कि उत्तराखंड सरकार, कुमाऊं कमिश्नर और ज़िला प्रशासन इस पर जल्द संज्ञान लें, ताकि किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि पर रोक लगाई जा सके।

Link copied to clipboard!