फर्जी एनकाउंटर मामले में पूर्व पुलिस अधिकारी प्रदीप शर्मा को बॉम्बे हाई कोर्ट ने उम्र कैद की सजा

Rihan Khan March 22, 2024 2 years ago Mumbai, POLICE
उन्हें ये सज़ा साल 2009 में राम नारायण गुप्ता उर्फ लखन भैया के फर्जी मुठभेड़ मामले में दी गई है. ( image bbc news)
  1. उन्हें तीन सप्ताह के अंदर खुद को सरेंडर करने का समय दिया गया है.
  2. लेकिन कोर्ट के फ़ैसले से उनकी राजनीतिक कोशिशों को झटका लगा है.

उन्हें अपनी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाना जाता है।

महाराष्ट्र के पूर्व पुलिस अधिकारी और एनकाउंटर स्पेशलिस्ट प्रदीप शर्मा को फर्जी एनकाउंटर मामले में दोषी पाया गया है। बॉम्बे हाई कोर्ट ने उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई है।प्रदीप शर्मा को विवादित एनकाउंटर मामले में दोषी पाया गया था, जिसमें एक नागरिक की हत्या के फर्जी एनकाउंटर का आरोप था। बॉम्बे हाई कोर्ट ने इस मामले में उन्हें दोषी पाया और उम्र कैद की सजा सुनाई है।प्रदीप शर्मा को महाराष्ट्र पुलिस के एक प्रमुख अधिकारी के रूप में मशहूरी हासिल है। उन्हें अपनी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में जाना जाता है। इसके बावजूद, उन्हें अपनी नियमों की उल्लंघन के लिए सजा सुनाई गई है।

शर्मा करीब 25 साल की नौकरी के बाद पिछले कुछ सालों से राजनीति में सक्रिय होने की कोशिश कर रहे थे.

प्रदीप शर्मा का राजनीतिक करियर एक बहुत ही रोचक और संघर्षपूर्ण कहानी है। उन्होंने पुलिस सेवा में अपना करियर शुरू किया और विभिन्न पदों पर कार्य किया, जिसने उन्हें समाज में मशहूरी प्राप्त करने में मदद की।प्रदीप शर्मा का उद्यमी और सक्रिय राजनीतिक करियर उनके पुलिस सेवा के बाद शुरू हुआ। उन्होंने अपने राजनीतिक सफर में भाजपा के साथ जुड़ा और विभिन्न स्तरों पर अपनी सेवाएं दी। उन्होंने राजनीतिक दल में कई उपाधियों को हासिल किया और अपने जुनून और कर्मठता से अपनी विशिष्ट पहचान बनाई।प्रदीप शर्मा की राजनीतिक क्रियाओं में सबसे विशेष रूप से उनके एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में कार्य करने की कहानी उज्ज्वल है। उनकी एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के रूप में शोभा और सम्मान की मिली और वे पुलिस विभाग में अग्रणी स्थान पर पहुंचे।हालांकि, उनका राजनीतिक करियर विवादों से भरा रहा है। उन्हें फर्जी एनकाउंटर के मामले में दोषी पाया गया है, जिसने उनकी छवि पर धारणा डाली है। इससे उनकी राजनीतिक करियर पर बड़ा प्रभाव पड़ा है और उन्हें सामाजिक और राजनीतिक मंचों पर अधिक नजरअंदाज किया जा रहा है।