हल्द्वानी को मिला नया ज़िला समन्वयक
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उत्तराखंड के उद्गम सिंह नगर जिले में एक दर्दनाक घटना सामने आई है, जिसमें 33 वर्षीय नर्स तस्लीम जहाँ की नृशंस हत्या कर दी गई है। धर्मेंद्र नामक एक व्यक्ति पर आरोप है कि उसने पहले तस्लीम का रे’प किया और फिर उसका गला घोंटकर हत्या कर दी। इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है। इस प्रकार की घटना न केवल समाज के भीतर छिपे हुए अपराधियों की मानसिकता को उजागर करती है, बल्कि यह भी सवाल खड़ा करती है कि ऐसे अपराधों पर सरकार और मीडिया का क्या रुख है।
तस्लीम जहाँ की हत्या के बाद, स्थानीय और राष्ट्रीय मीडिया में इस घटना को लेकर अपेक्षित रूप से आवाज नहीं उठाई गई है। यह खामोशी सवाल खड़े करती है। क्या मीडिया इस मामले को इसलिए नजरअंदाज कर रही है क्योंकि उत्तराखंड में बीजेपी की सरकार है? ऐसे मामलों में मीडिया की जिम्मेदारी होती है कि वह न केवल सच को उजागर करे बल्कि पीड़ित के परिवार को न्याय दिलाने में मदद भी करे। लेकिन इस मामले में, मीडिया की चुप्पी एक बार फिर से उसके पक्षपात को उजागर करती है।
हालांकि मुख्यधारा की मीडिया में इस घटना को लेकर चुप्पी है, लेकिन सोशल मीडिया पर #JusticeForTasleemJahan ट्रेंड कर रहा है। ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर लोग तस्लीम के लिए न्याय की मांग कर रहे हैं। यह सोशल मीडिया की ताकत को दर्शाता है, जो ऐसे मामलों में आवाज उठाने का काम कर रही है, जहां मुख्यधारा की मीडिया असफल हो रही है। सोशल मीडिया पर आम जनता का गुस्सा स्पष्ट है, और यह गुस्सा सरकार और पुलिस के प्रति भी निर्देशित हो रहा है, जो इस मामले में अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर पाई है।
तस्लीम जहाँ के परिवार ने इस घटना की सीबीआई जांच की मांग की है। उनके अनुसार, स्थानीय पुलिस द्वारा मामले की निष्पक्ष जांच पर भरोसा नहीं किया जा सकता। परिवार का कहना है कि उन्हें न्याय तभी मिलेगा जब इस मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच की जाएगी। सीबीआई की जांच से यह उम्मीद की जा सकती है कि तस्लीम के परिवार को न्याय मिलेगा और दोषी को सजा दी जाएगी।
उत्तराखंड में इस घटना के बाद राज्य सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। क्या सरकार इस मामले को लेकर गंभीर है? अगर हां, तो अब तक क्या कदम उठाए गए हैं? क्या तस्लीम जहाँ के परिवार को सुरक्षा और न्याय मिल पाएगा? सरकार की निष्क्रियता जनता के गुस्से को और बढ़ा रही है। जनता यह जानना चाहती है कि सरकार कब जागेगी और तस्लीम जैसे निर्दोष नागरिकों की सुरक्षा के लिए क्या कदम उठाएगी।
धर्मेंद्र नामक व्यक्ति पर जो आरोप लगे हैं, वे बेहद गंभीर हैं। लेकिन सवाल यह उठता है कि ऐसे अपराधियों को सजा कब मिलेगी? न्यायपालिका और कानून व्यवस्था को यह सुनिश्चित करना होगा कि तस्लीम जहाँ के हत्यारे को सख्त से सख्त सजा मिले। अगर ऐसा नहीं होता, तो यह अन्य अपराधियों को प्रोत्साहित कर सकता है कि वे भी ऐसे घिनौने अपराधों को अंजाम देने से न डरें।
तस्लीम जहाँ की हत्या ने समाज और न्याय प्रणाली की एक बार फिर से परीक्षा ली है। यह घटना सिर्फ एक नारी की हत्या नहीं है, बल्कि यह हमारे समाज में व्याप्त हिंसा और असमानता की गहरी जड़ें भी उजागर करती है। हमें मिलकर यह सुनिश्चित करना होगा कि तस्लीम जहाँ को न्याय मिले और भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
तस्लीम जहाँ के लिए न्याय की लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है। उनके परिवार, दोस्तों, और सोशल मीडिया पर सक्रिय लोगों की आवाज तब तक थमने वाली नहीं है, जब तक कि दोषी को सजा नहीं मिलती। यह संघर्ष सिर्फ तस्लीम के लिए नहीं है, बल्कि उन सभी निर्दोषों के लिए है, जो इस प्रकार के अत्याचारों का शिकार होते हैं। न्याय की इस लड़ाई में हर नागरिक का कर्तव्य है कि वह आवाज उठाए और इस प्रकार की घटनाओं के खिलाफ खड़ा हो।
ट्विटर और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर #JusticeForTasleemJahan ट्रेंड हो रहा है, जो इस बात का संकेत है कि जनता न्याय के लिए खड़ी है। जब तक तस्लीम जहाँ के लिए न्याय नहीं मिलता, यह पुकार जारी रहेगी। समाज का हर जिम्मेदार नागरिक इस लड़ाई का हिस्सा बनकर तस्लीम और उनके परिवार को न्याय दिलाने में सहयोग कर सकता है।
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