हल्द्वानी को मिला नया ज़िला समन्वयक
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हल्द्वानी में कथित तौर पर इन दिनों अवैध और बिना कागजात के चल रही बसों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। इन बसों को ऑनलाइन बुकिंग के माध्यम से दिल्ली, जयपुर सहित कई अन्य रूट्स पर चलाया जा रहा है। सवाल यह उठता है कि क्या परिवहन विभाग के अधिकारियों को इस फर्जीवाड़े की जानकारी नहीं है, या फिर जानबूझकर इसे नजरअंदाज किया जा रहा है? ये अवैध बसें किसके संरक्षण में चल रही हैं, और इनके संचालन में इतनी छूट कैसे मिल रही है?

इन अवैध बसों की कोई चेकिंग नहीं होती है, न ही इनके संचालन पर कोई रोक-टोक है। इनमें काम करने वाला स्टाफ भी अनपढ़ और दूसरे राज्यों से आता है, जिनका सत्यापन भी नहीं किया गया है। यह स्टाफ रात में यहीं रुकता है, लेकिन सवाल यह है कि क्या इन लोगों का कोई पुलिस वेरिफिकेशन हुआ है? ये किस तरह की प्रवृत्ति के लोग हैं, इसका कोई लेखा-जोखा नहीं है। ऐसे हालात में यात्रियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। उनसे किसी समस्या की शिकायत करते हैं तो वे सीधे मारपीट पर उतर आते हैं।

इन बसों का कोई निर्धारित समय नहीं होता है। ये बसें अपनी मर्जी से किसी भी जगह रुकती हैं और यात्रियों को महंगे ढाबों पर खाने के लिए मजबूर किया जाता है। इन ढाबों पर यात्रियों से भारी कीमत वसूली जाती है, जिससे यात्रियों को आर्थिक नुकसान होता है। यह पूरी प्रक्रिया एक सुनियोजित लूट का हिस्सा लगती है, जिसमें कुछ खास लोग शामिल हो सकते हैं।
इन अवैध बसों की ऑनलाइन बुकिंग प्रणाली भी सवालों के घेरे में है। जब यात्री किसी समस्या की शिकायत करते हैं, तो उनके द्वारा दिए गए फोन नंबरों पर कोई जवाब नहीं मिलता। इस तरह की बुकिंग यात्रियों के साथ धोखाधड़ी का एक नया तरीका बन गया है, जिससे उनका पैसा और समय दोनों बर्बाद हो रहा है।
इन बसों के पास उत्तराखंड में चलने के लिए कोई कागजात नहीं है? फिर भी ये राज्य में बेरोकटोक चल रही हैं। सवाल यह है कि क्या इन बसों के पीछे किसी बड़े प्रशासनिक अधिकारी या नेता का संरक्षण है? राज्य परिवहन विभाग क्यों इन अवैध बसों के खिलाफ कोई सख्त कार्रवाई नहीं कर रहा है?
मैं रोड पर गाड़ियों को खड़ा कर सवारियां बेठाई जाती है जिससे रोड ब्लॉक हो जाते है इन अवैध बसों में सफर करना यात्रियों की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है। इन बसों में तकनीकी समस्याओं के अलावा कोई भी सुरक्षा मापदंड नहीं अपनाए जाते। अगर किसी यात्री को कोई शारीरिक नुकसान होता है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?
अगर आपके पास कोई छोटा बॉक्स या सामान होता है, तो इन बसों में आपको इसके लिए अलग से चार्ज किया जाता है। बिना बिल के 300 से 400 रुपये तक वसूले जाते हैं, और अगर आपके पास दो बॉक्स हैं तो यह रकम 600 से 1000 रुपये तक पहुंच जाती है। यह साफ तौर पर यात्रियों की जेब पर डाका डालने के समान है, जो पूरी तरह से गैरकानूनी है।
यात्रियों से अनुरोध है कि इस तरह की अवैध बसों का इस्तेमाल न करें। यह न केवल आपके पैसे की बर्बादी है, बल्कि आपकी जान और माल दोनों को भी खतरे में डाल सकता है। इस तरह के फर्जीवाड़े से बचने के लिए सतर्क रहें और केवल मान्यता प्राप्त परिवहन सेवाओं का ही उपयोग करें।इस पूरे मामले में जल्द ही कोई सख्त कार्रवाई न की गई, तो यह यात्रियों के लिए एक बड़ा खतरा साबित हो सकता है।
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