हल्द्वानी नुमाइश – नियमों की धज्जियां, सुरक्षा में सेंध
स्थानीय लोग और संगठन पहले ही अव्यवस्थाओं और संभावित खतरे की चेतावनी दे चुके थे, फिर भी अनुमति दी गई। सवाल है—क्या ये फैसला किसी बड़े ठेकेदार और अधिकारी की मिलीभगत से हुआ?
सरकारी विभागों की खामोश मिलीभगत?


ADM विवेक राय के इस बयान पर भी ध्यान दे प्रशासन
नगर निगम, खाद्य विभाग, पुलिस, यातायात विभाग—सभी की जिम्मेदारी है कि व्यवस्था देखें, लेकिन सब खामोश हैं। क्या आदेश ऊपर से है कि आंखें बंद कर ली जाएं? अगर नहीं, तो कार्रवाई क्यों नहीं?
15 अगस्त से पहले खतरे की घंटी
नुमाइश में रोज हजारों की भीड़, लेकिन अग्निशमन गाड़ियां, आपातकालीन निकास, मेडिकल टीम—सब बस दिखावे के लिए। 15 अगस्त पर भीड़ कई गुना बढ़ेगी। क्या प्रशासन ने कभी सोचा है कि भगदड़ या आतंकी वारदात जैसी घटना में क्या होगा?
क्या हादसा होने के बाद ही जागेगा प्रशासन?
इतिहास गवाह है कि देशभर में ऐसे आयोजनों में लापरवाही ने कितनी जिंदगियां छीनी हैं। हल्द्वानी में भी हालात उसी ओर इशारा कर रहे हैं। अब सवाल है—क्या प्रशासन को सबक लेने के लिए हादसे का इंतज़ार है?
अब भी वक्त है – ठोस कदम उठाओ
सभी दुकानदारों का तत्काल सत्यापनसभी खाद्य स्टॉल का FSSAI जांच और प्रमाणपत्र अनिवार्य
GST विवरण के बिना किसी भी टिकट या ठेके को तुरंत रद्द
ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण के लिए अतिरिक्त फोर्स
15 अगस्त के लिए अलग सुरक्षा और इमरजेंसी प्लान
हल्द्वानी नुमाइश फिलहाल एक बारूद के ढेर पर बैठी है। अगर तुरंत सख्त कदम नहीं उठाए गए, तो यह आयोजन किसी दिन मातम में बदल सकता है। 15 अगस्त प्रशासन के लिए सिर्फ स्वतंत्रता दिवस नहीं, बल्कि अपनी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता साबित करने का असली इम्तिहान होगा।
