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हल्द्वानी, 11 अक्टूबर: हल्द्वानी में जातीय उत्पीड़न के मामले में बलराम सिंह (पाल) ने भीम आर्मी कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई है। बलराम सिंह, जो खटीक एससी जाति से हैं और जवाहर ज्योति हल्दीखान, दमुवाढूंगा में रहते हैं, ने आरोप लगाया है कि उनके पड़ोस में रहने वाले अधिकांश लोग सामान्य वर्ग के हैं, और उनकी जाति का पता चलते ही उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।

बलराम सिंह के मकान के बगल में नवीन चंद्र जोशी नामक व्यक्ति रहते हैं। बलराम सिंह के अनुसार, जब जोशी को उनकी जाति के बारे में पता चला, तो उन्होंने बलराम सिंह से आधार कार्ड और जाति प्रमाण पत्र दिखाने की मांग की। इसके बाद, जोशी ने बलराम सिंह पर मकान बेचकर जाने का दबाव डालना शुरू कर दिया। बलराम सिंह ने मकान बेचने से इंकार कर दिया, जिसके बाद उनके परिवार को उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। बलराम सिंह ने कहा कि उनके पीठ पीछे जोशी परिवार के लोगों ने उनकी पत्नी के साथ मारपीट की।

बलराम सिंह ने बताया कि उन्होंने इस घटना की सूचना 6 अक्टूबर को ही काठगोदाम थाने में दे दी थी। उन्होंने पुलिस से सीसीटीवी फुटेज के आधार पर विधिक कार्रवाई की मांग की थी, परंतु 10 अक्टूबर तक पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने कहा, “मैंने 10 अक्टूबर को एसएसपी मीणा जी से कानूनी कार्रवाई की मांग की है, पर मुझे नहीं लगता कि कोई ठोस कदम उठाया जाएगा।”
इस मामले में न्याय की तलाश में बलराम सिंह ने भीम आर्मी के जिला अध्यक्ष नफीस अहमद खान से संपर्क किया। नफीस अहमद ने बलराम सिंह को आश्वासन दिया कि यदि 48 घंटों के भीतर पुलिस द्वारा एफआईआर दर्ज नहीं की जाती और उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो भीम आर्मी उनके साथ खड़ी रहेगी। उन्होंने कहा, “एसएसपी साहब ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है, इसलिए उन्हें दो दिन का समय दें। यदि कार्रवाई नहीं होती है, तो हम पुलिस के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करेंगे और जरूरत पड़ने पर अनिश्चितकालीन धरने पर भी बैठेंगे।”
नफीस अहमद खान ने बलराम सिंह को भरोसा दिलाया कि यदि स्थानीय पुलिस द्वारा न्याय नहीं दिया गया, तो वे पुलिस के उच्चाधिकारियों से भी बातचीत करेंगे। इसके बावजूद अगर न्याय नहीं मिला, तो भीम आर्मी चंद्रशेखर आजाद से संपर्क कर इस मामले को और अधिक गंभीरता से उठाएगी। उन्होंने कहा, “हम हर हाल में आपको न्याय दिलाकर रहेंगे।”
इस मुद्दे पर बलराम सिंह से बातचीत करने वालों में नफीस अहमद खान के अलावा नगर अध्यक्ष विकास कुमार, एडवोकेट जगदीश चंद्र, एडवोकेट गंगा प्रसाद, बबलू जी, सुंदरलाल बौद्ध, पार्षद रोहित कुमार, रिजवान खान और नवल किशोर शामिल थे। इन सभी ने बलराम सिंह को पूर्ण समर्थन देने का वादा किया है।
इस घटना ने एक बार फिर से पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। बलराम सिंह का कहना है कि 6 अक्टूबर को काठगोदाम थाने में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। सवाल यह है कि जब पीड़ित ने सीसीटीवी फुटेज और प्रत्यक्ष साक्ष्यों के साथ शिकायत की, तो पुलिस ने अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की?
यह घटना हल्द्वानी में जातीय उत्पीड़न के बढ़ते मामलों को उजागर करती है। सामान्य वर्ग और अनुसूचित जाति के बीच के इस भेदभाव ने समाज में चिंता उत्पन्न कर दी है। बलराम सिंह के मामले में पुलिस द्वारा अब तक की गई ढिलाई इस बात का प्रमाण है कि जातीय भेदभाव के मामलों में न्याय पाने के लिए पीड़ितों को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
भीम आर्मी ने हमेशा से जातीय उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाई है और पीड़ितों को न्याय दिलाने का काम किया है। नफीस अहमद खान ने बलराम सिंह को आश्वासन दिया है कि भीम आर्मी इस लड़ाई में उनके साथ है। अब यह देखना होगा कि पुलिस प्रशासन 48 घंटों के भीतर क्या कदम उठाता है, और यदि पुलिस निष्क्रिय रहती है, तो क्या भीम आर्मी अपने वादे के अनुसार धरना-प्रदर्शन करेगी?
बलराम सिंह का मामला सिर्फ एक व्यक्ति का नहीं है, बल्कि यह समाज में व्याप्त जातीय भेदभाव की एक गंभीर समस्या को उजागर करता है। इस मामले में भीम आर्मी और पुलिस प्रशासन की भूमिका आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगी, क्योंकि यह मामला समाज में एक उदाहरण बन सकता है कि कैसे जातीय भेदभाव के खिलाफ संघर्ष किया जा सकता है।
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