धामी सरकार की जनहितकारी सोच साकार: धारी में बहुद्देशीय शिविर से सैकड़ों लोगों को मिला त्वरित लाभ
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उत्तराखंड के देहरादून स्थित ISBT बस स्टैंड पर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां 15 साल की मानसिक रूप से विक्षिप्त बालिका के साथ अनुबंधित बस के भीतर गैंगरेप हुआ। इस जघन्य अपराध में बस के ड्राइवर, परिचालक और सफाईकर्मी समेत 6 लोगों को पुलिस ने हिरासत में लिया है। इस घटना ने राज्य में सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
घटना की शुरुआत तब हुई जब ISBT बस स्टैंड पर पुलिस ने एक किशोरी को बदहवास हालत में पाया। वह बेहद सहमी हुई थी और उसे तुरंत चिकित्सा सहायता और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान की गईं। पहले तो किशोरी ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया, लेकिन जब उसकी काउंसलिंग की गई, तो उसने खुलासा किया कि उसके साथ बस में सामूहिक दुष्कर्म किया गया था। किशोरी पंजाब की निवासी है और घटना से पहले उसने पंजाब से दिल्ली, फिर मुरादाबाद और अंत में देहरादून की यात्रा की थी।
किशोरी के बयान और प्रारंभिक जांच के आधार पर पुलिस ने तेजी से कार्रवाई करते हुए 6 आरोपियों को हिरासत में लिया है। इनमें धर्मेंद्र कुमार, जो कि बंजारावाला ग्रांट, बुग्गावाला हरिद्वार का रहने वाला है और बस का ड्राइवर है; देवेंद्र, चुड़ियाला भगवानपुर का निवासी और बस का कंडक्टर है; रवि कुमार, नवाबगंज जिला फर्रुखाबाद उत्तर प्रदेश का निवासी और ड्राइवर है; राजपाल, बंजारावाला ग्रांट बुग्गावाला हरिद्वार का रहने वाला और ड्राइवर है; और राजेश कुमार सोनकर, माजरा पटेलनगर का निवासी और बस का कैशियर है। इन सभी पर बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म करने का आरोप है।
पुलिस ने आरोपियों को हिरासत में लेने के बाद उन्हें न्यायालय में पेश किया और न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस मामले में पुलिस की तत्परता ने समाज में एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है कि ऐसे अपराधों को किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पुलिस अब इस मामले की गहन जांच कर रही है और अन्य संभावित संदिग्धों की तलाश कर रही है जो इस जघन्य अपराध में शामिल हो सकते हैं।
इस घटना के सामने आने के बाद समाज में गहरा आक्रोश व्याप्त है। लोग इस बात को लेकर चिंतित हैं कि सार्वजनिक परिवहन जैसे स्थान पर इस तरह का घिनौना अपराध कैसे हो सकता है। सरकार ने भी इस घटना पर गंभीरता से संज्ञान लिया है और संबंधित अधिकारियों को कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। महिला संगठनों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इस घटना की कड़ी निंदा की है और पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए संघर्ष करने की बात कही है।
इस घटना ने एक बार फिर से देश में महिलाओं और बच्चियों की सुरक्षा को लेकर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सरकार और प्रशासन से इस मामले में त्वरित और कठोर कार्रवाई की उम्मीद की जा रही है ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों। न्याय की मांग करते हुए लोगों ने प्रदर्शन किया है और दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा देने की मांग की है।इस घटना ने समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आखिर हम किस दिशा में जा रहे हैं, और क्या हमारी बेटियां और बहनें सुरक्षित हैं? इसे रोकने के लिए समाज, सरकार और कानून व्यवस्था को मिलकर काम करना होगा ताकि देश में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।
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