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हल्द्वानी में आज इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) के आह्वान पर एक शांति मार्च का आयोजन किया गया। इस मार्च का उद्देश्य 2012 के बहुचर्चित निर्भया मामले की यादों को ताजा करना और हाल ही में कलकत्ता में हुई एक और बर्बर घटना का विरोध करना था, जिसमें आर. जी. मेडिकल कॉलेज की पीजी डॉक्टर के साथ दुष्कर्म और निर्मम हत्या कर दी गई थी।


निर्भया मामले को आज 12 साल हो गए हैं, लेकिन देश में महिलाओं की सुरक्षा के मामले में कोई खास सुधार नहीं हुआ है। हल्द्वानी में हुए इस शांति मार्च में यह बात प्रमुखता से उठाई गई। लोगों ने कहा कि निर्भया मामले के बाद जिस तरह से देशभर में गुस्से की लहर उठी थी, वही भावना आज फिर से जाग उठी है।
कलकत्ता की इस घटना ने डॉक्टर समुदाय को झकझोर कर रख दिया है। मार्च में भाग ले रहे डॉक्टरों का कहना था कि डॉक्टरों के साथ ऐसी घटनाओं का होना अत्यंत चिंताजनक है। चिकित्सा समुदाय को पहले से ही कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है, और अब इस तरह की घटनाओं ने उनकी सुरक्षा पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं।
राजकीय मेडिकल कॉलेज के गेट से शहीद पार्क, नैनीताल रोड तक पैदल मार्च निकाला गया। इसमें बड़ी संख्या में मेडिकल छात्र, डॉक्टर, और नागरिक शामिल हुए। उन्होंने हाथों में तख्तियां लिए नारे लगाए, जिनमें महिलाओं की सुरक्षा और न्याय की मांग की गई।
आइएमए ने इस घटना के विरोध में राष्ट्रीय स्तर पर आंदोलन की चेतावनी दी है। उनका कहना है कि जब तक सरकार महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित नहीं करती, तब तक इस तरह के प्रदर्शन जारी रहेंगे। आइएमए ने इस घटना की सीबीआई जांच की मांग भी की है, ताकि दोषियों को जल्द से जल्द सजा मिल सके।
हल्द्वानी के प्रशासनिक अधिकारियों ने शांति मार्च में भाग लेने वालों को आश्वासन दिया कि वे इस मामले को उच्च अधिकारियों तक पहुंचाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत किया जाएगा, ताकि इस तरह की घटनाएं भविष्य में न हो सकें।
शांति मार्च के दौरान प्रतिभागियों ने मांग की कि इस मामले में जल्द से जल्द न्याय हो। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा को रोकने के लिए कठोर कानून बनाए जाने चाहिए और उनका सख्ती से पालन होना चाहिए।
शांति मार्च का उद्देश्य न केवल प्रशासन पर दबाव बनाना था, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाना भी था। महिलाओं के प्रति हिंसा को रोकने के लिए सामाजिक बदलाव की आवश्यकता है। इस बदलाव के लिए हर व्यक्ति को अपने स्तर पर प्रयास करने होंगे।
एक और महत्वपूर्ण मुद्दा उठाया गया, वह था डॉक्टरों की सुरक्षा। चिकित्सा पेशे से जुड़े लोगों ने कहा कि सरकार को डॉक्टरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए। अस्पतालों में सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम होने चाहिए ताकि इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
आइएमए ने इस घटना के विरोध में आगे भी विभिन्न शहरों में ऐसे शांति मार्च और प्रदर्शन करने की योजना बनाई है। उनका उद्देश्य सरकार और समाज दोनों को इस मुद्दे पर गंभीरता से सोचने पर मजबूर करना है।
हल्द्वानी के नागरिकों ने इस शांति मार्च में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया और डॉक्टरों के समर्थन में आवाज उठाई। उन्होंने कहा कि इस तरह की घटनाएं पूरे समाज के लिए एक बड़ा धक्का हैं, और सभी को मिलकर इनका विरोध करना चाहिए।
हल्द्वानी में हुए इस शांति मार्च ने यह स्पष्ट कर दिया है कि समाज में महिलाओं के प्रति हो रही हिंसा के खिलाफ आक्रोश बढ़ रहा है। आइएमए का यह कदम सराहनीय है, और यह उम्मीद की जाती है कि सरकार इस पर गंभीरता से विचार करेगी और महिलाओं की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाएगी।
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