हल्द्वानी: बनभूलपुरा के नाम पर सियासत, कई वार्ड जलभराव-गंदगी से बेहाल—विकास के दावे सवालों में

वार्ड 31 से लेकर कई अन्य वार्डों में हालात बदतर, मेयर के बयान और कांग्रेस की पकड़ के बीच जनता परेशान

हल्द्वानी (बनभूलपुरा):
शहर की राजनीति में बनभूलपुरा का नाम लगातार गूंजता है, लेकिन जमीनी सच्चाई इससे बिल्कुल उलट नजर आती है। वार्ड नंबर 31 ही नहीं, बल्कि आसपास के कई वार्ड आज भी जलभराव और गंदगी जैसी बुनियादी समस्याओं से जूझ रहे हैं।

हल्की सी बारिश होते ही गलियां तालाब बन जाती हैं। सड़कों पर भरा गंदा पानी, तैरता कचरा और बदबूदार माहौल—यह तस्वीर किसी एक इलाके की नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की हकीकत बन चुकी है।
मेयर के बयान बनाम जमीनी हालात
नगर निगम के मेयर अक्सर हर मुद्दे में बनभूलपुरा का जिक्र करते हैं, लेकिन जब इस क्षेत्र की समस्याओं को हल करने की बात आती है, तो हालात जस के तस बने हुए हैं।
वार्ड 31 से लेकर कई अन्य वार्डों में जल निकासी व्यवस्था पूरी तरह फेल नजर आ रही है। सवाल उठता है—क्या बयानबाजी ही जिम्मेदारी निभाने का पैमाना बन गया है?
कांग्रेस का मजबूत गढ़, फिर भी विकास गायब
बनभूलपुरा को का मजबूत गढ़ माना जाता है। स्थानीय स्तर पर हर दूसरे घर में कांग्रेस से जुड़े लोग मिल जाते हैं।
लेकिन जब इतने बड़े राजनीतिक प्रभाव के बावजूद क्षेत्र की हालत बदहाल हो, तो सवाल और भी बड़े हो जाते हैं—
- क्या स्थानीय नेता सिर्फ चुनाव तक सीमित हैं?
- क्या जनता की समस्याएं प्राथमिकता में नहीं हैं?
नगर निगम की अनदेखी या मिलीभगत?
जल निकासी और सफाई के नाम पर हर साल लाखों का बजट खर्च होता है, लेकिन वार्ड 31 समेत कई वार्डों की तस्वीरें कुछ और ही कहानी कहती हैं।
- नालियां जाम
- कचरे के ढेर
- सड़कों पर भरा गंदा पानी
यह हालात केवल लापरवाही नहीं, बल्कि सिस्टम की गंभीर विफलता की ओर इशारा करते हैं।
बीमारियों का बढ़ता खतरा
जलभराव और गंदगी के कारण डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों का खतरा तेजी से बढ़ रहा है। बच्चे और बुजुर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
स्थानीय लोगों का कहना है—
“हर बारिश के बाद यही हाल होता है, लेकिन कोई स्थायी समाधान नहीं किया जाता।”
जनता का सीधा सवाल
- वार्ड 31 से लेकर अन्य वार्डों की यह हालत कब सुधरेगी?
- मेयर और नगर निगम आखिर कब एक्शन लेंगे?
- कांग्रेस के मजबूत नेटवर्क के बावजूद विकास जमीन पर क्यों नहीं दिख रहा?
बनभूलपुरा आज राजनीतिक बहस का केंद्र जरूर है, लेकिन वार्ड 31 से लेकर कई अन्य वार्डों की बदहाली यह साबित करती है कि ‘विकास’ अभी भी कागजों तक सीमित है।
अगर अब भी जिम्मेदार नहीं जागे, तो यह समस्या सिर्फ एक वार्ड नहीं, बल्कि पूरे शहर के लिए खतरा बन सकती है।
